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कभी वाजपेयी जैसे नेताओं के चिपकाते थे पोस्टर, आज खुद बन चुके हैं पार्टी का 'पोस्टर बॉय'

इन दिनों अमित शाह को बीजेपी नहीं ही आधुनिक भारत का चाणक्य कहा जाने लगा है। 17वीं लोकसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत का श्रेय जहां नरेंद्र मोदी को जाता है वहीं इस ऐतिहासिक जीत के रणनीतिकार अमित शाह को माना जाता है।

पंकज मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (30 मई): इन दिनों अमित शाह को बीजेपी नहीं ही आधुनिक भारत का चाणक्य कहा जाने लगा है। 17वीं लोकसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत का श्रेय जहां नरेंद्र मोदी को जाता है वहीं इस ऐतिहासिक जीत के रणनीतिकार अमित शाह को माना जाता है। सियासी जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि 'नरेंद्र मोदी और अमित शाह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वो दशकों से एक साथ रहे हैं। वो एक जैसा सोचते हैं। वो एक परफेक्ट टीम की तरह काम करते हैं।' अमित शाह को राजनीति में बीजेपी का मास्टर माइंड और नरेंद्र मोदी का दाहिना हाथ कहा जाता हैं। पिछले 10 सालों में ना केवल केंद्र की राजनीति में बीजेपी का सकारात्मक प्रभाव दिखा हैं बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भी अमित शाह की कूटनीति से बीजेपी मजबूत हुई। पिछले कई सालों से केंद्र की राजनीति में बीजेपी के महत्व का बढ़ना और लगातार जीतने का कारण नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को माना जाता हैं। वो लड़का जो कभी अटल बिहारी वाजपेयी और बीजेपी के दूसरे दिग्गज नेताओं के लिए पोस्टर चिपकाता था, आज खुद पार्टी का पोस्टर बॉय बन चुका है। 2014 में भारतीय जनता पार्टी को शानदार जीत दिलाने के बाद अमित शाह रुके नहीं, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के तौर पर बीजेपी को 2019 में 2014 से भी बड़ी जीत दिलाने का करिश्मा कर दिखाया। अमित शाह केवल 14 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े। जब वे नरेंद्र मोदी से पहली बार मिले तो उनकी उम्र केवल 17 साल थी। शाह ने मोदी को तभी प्रभावित कर दिया था। 22 साल की उम्र में अमित शाह बीजेपी में शामिल हुए, 35 की उम्र में मंत्री बन गए और 50 साल की उम्र में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पद संभाल लिया। अमित शाह बीजेपी के अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की तरह अमित शाह भी गुजरात से आते हैं। अमित शाह का जन्म 22 अक्तूबर 1964 को मुंबई के एक जैन बनिया परिवार में हुआ था। अमित शाह की पत्नी का नाम सोनल शाह और एकमात्र पुत्र का नाम जय शाह है। 14 वर्ष की छोटी आयु में वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए थे और यहीं से अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। गांधीनगर के एक छोटे से शहर मनसा में 'तरुण स्वयंसेवक' के रूप उन्होंने संघ में काम किया। इसके बाद अमित शाह अपनी कॉलेज की पढ़ाई के लिए अहमदाबाद आए, जहां उन्होंने बीजेपी छात्र संगठन एबीवीपी की सदस्यता ली। 1982 में बायो-केमेस्ट्री के छात्र के रूप में अमित शाह अहमदाबाद में छात्र संगठन एबीवीपी के सचिव चुने गए। 1982 में उनके अपने कॉलेज के दिनों में अमित शाह की मुलाक़ात नरेंद्र मोदी से हुई। इसके बाद अमित शाह बीजेपी की अहमदाबाद इकाई के सचिव बने। इसके बाद से उन्होंने पार्टी के भीतर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बने, इसके बाद 1999 बीजेपी प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष बनाए गए। 2000 में अमित शाह अहमदाबाद ज़िला सहकारी बैंक के चेयरमैन बने। अमित शाह 1997 से लेकर 2012 तक लगातार पांच टर्म तक गुजरात विधानसभा के सदस्य रहे। अमित शाह 2002 से 2010 तक गुजरात सरकार में मंत्री रहे। 2009 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ क्रिकेट एसोसिएशन अहमदाबाद के अध्यक्ष और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रहे। शोहराबुद्दीन कौसर बी फर्जी एनकाउंटर मामले में 2010 में अमित शाह को गिरफ्तार किया। इसके बाद 2013 में वो बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने। 2014 में गुजरात राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने और 2014 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इसके बाद से लगातार बीजेपी अध्यक्ष के पद पर बने हुए हैं।

आम लोगों की तरह अमित शाह के जीवन में भी निराशा का दौर आया। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारा।  गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख़ और उनकी पत्नी कौसर बी के कथित फ़र्ज़ी एनकाउंटर में उनका नाम आया। सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी को 2005 में एनकाउंटर में मार दिया गया था, उस समय अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे। इसके अलावा अमित शाह का नाम 2006 में सोहराबुद्दीन के साथी तुलसीराम प्रजापति के कथित फ़र्ज़ी एनकाउंटर में भी आया। 25 जुलाई 2010 को अमित शाह को गिरफ़्तार किया गया और 29 अक्तूबर 2010 को उन्हें जमानत मिली। उन पर अक्तूबर 2010 से लेकर सितंबर 2012 तक गुजरात में दाखिल होने पर रोक थी। आखिरकार कानूनी लड़ाई के बाद सीबीआई कोर्ट ने 30 दिसंबर 2014 को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। ये अमित शाह की जिंदगी के लिए बेहद उतार-चढ़ाव वाले दिन रहे। 

सोलहवीं लोकसभा चुनाव के लगभग 10 महीने पहले जून 2013 को भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया, तब प्रदेश में बीजेपी की महज 10 लोक सभा सीटें ही थी। उनके संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व क्षमता का अंदाजा तब लगा जब 16 मई 2014 को सोलहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आए। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 71 सीटें हासिल की। प्रदेश में बीजेपी की ये अब तक की सबसे बड़ी जीत ‌थी। इस करिश्माई जीत के‌ शिल्पकार रहे अमित शाह का कद पार्टी के भीतर इतना बढ़ा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पद प्रदान किया गया।


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