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जेडीयू और बीजेपी में मतभेद !, नीतीश ने अबतक नहीं जारी किया घोषणापत्र

तीन चरणों के चुनाव खत्म होने के बावजूद जेडीयू अबतक अपना घोषणापत्र जारी नहीं कर सका है। बीजेपी, कांग्रेस, आरजेडी, एलजेपी, आरएलएसपी और हम जैसी पार्टियां अपना घोषणापत्र जारी कर चुकी है और इसके आधार पर जनता से वोट मांग रही है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 अप्रैल): तीन चरणों के चुनाव खत्म होने के बावजूद जेडीयू अबतक अपना घोषणापत्र जारी नहीं कर सका है।  बीजेपी, कांग्रेस, आरजेडी, एलजेपी, आरएलएसपी और हम जैसी पार्टियां अपना घोषणापत्र जारी कर चुकी है और इसके आधार पर जनता से वोट मांग रही है। लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के घोषणापत्र पर अबतक सस्पेंस बरकरार है। सूत्रों के मिल रही जानकारी के मुताबिक जेडीयू ने घोषणापत्र तैयार कर लिया था और इसे 14 अप्रैल को ही जारी होना था, लेकिन पार्टी ने अब इसे टालने का मूड बना लिया है। अब अगर जेडीयू चुनाव संपन्न होने तक घोषणापत्र जारी नहीं करती है तो  2003 में पार्टी के बनने के बाद से अबतक पहली बार ऐसा होगा जब जेडूयू ने अपना घोषणा पत्र जारी नहीं किया।बताया जा रहा है कि जेडीयू की सहयोगी बीजेपी ने धारा 370, कॉमन सिविल कोड और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण जैसे मुद्दों को अपने घोषणापत्र में रखा है। जेडीयू की इसपर अलग राय है। नीतीश की पार्टी ने धारा 370 की रक्षा करने की कसम खाई और साथ ही राम मंदिर निर्माण का फैसला कोर्ट के हवाले छोड़ दिया। जानकारों के मुताबिक जेडीयू को चिंता है कि आर्टिकल 370, आर्टिकल 35ए, यूनिफॉर्म सिविल कोड और राम मंदिर पर उनकी राय बीजेपी से अलग है। ऐसे में जनता को मतभेद दिखा तो राज्य में उनके गठबंधन को नुकसान हो सकता है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबित जेडीयू के कई नेताओं का मानना है कि वैचारिक मतभेद की वजह से चुनावी कैंपेन को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। जहां पीएम खुद 370 को खत्म करने और राम मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं वहीं नीतीश कुमार मोदी को फिर पीएम बनाने का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में बेहतर है कि चुनाव खत्म होने तक विवाद वाले मुद्दों को बाहर न लाया जाए।'वहीं जेडीयू के घोषणापत्र नहीं जारी होने पर सियासी सरगर्मी भी तेज हो गई है। जेडीयू पर चुटकी लेते हुए विपक्षी पार्टियों का कहना है कि  घोषणापत्र को लेकर नीतीश कुमार कहेंगे कि हम सेक्युलर हैं। दूसरी ओर आरएसएस और साम्प्रदायिक शक्ति वाली पार्टी बीजेपी की गोद में बैठे हुए हैं। ऐसे में ये दोहरी नीति नहीं चलेगी इसलिए वो घोषणापत्र जारी नहीं करेंगे।


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