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अब तक किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने पूरा नहीं किया है कार्यकाल

ऩई दिल्ली (29 जुलाई): भारत और पाकिस्तान एक साथ ही गुलामी के बेड़ियों से आजाद हुए थे। दोनों ने अपने भविष्य के लिए नींव तैयार की और आगे बढ़े। दोनों देश आजाद मुल्क रहते हुए 70 साल की अवधि को पार कर चुके हैं लेकिन एक नजर पीछे घुमाकर देखने पर दोनों की तस्वीर में काफी अंतर दिखाई देता है। भारत में आजादी के बाद से अब तक 14 प्रधानमंत्री हुए। सभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सत्ता में आए और अपनी कार्यअवधि को पूरा किया लेकिन पड़ोसी मुल्क में ऐसा नहीं है। पाकिस्तान में अब तक 17 प्रधानमंत्री हुए हैं और किसी ने अपना कार्यकाल तक पूरा नहीं किया है। शुक्रवार को पनामागेट में नवाज शरीफ पर फैसला आया। नवाज तीसरी बार पाकिस्तान के पीएम बने थे और ये तीसरी बार था जब वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 

1- लियाकत अली खानः 15 अगस्त 1947 को लियाकत अली खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। वह देश के पहले पीएम थे। मुस्लिम लीग से आने वाले खान को गवर्नर जनरल ने नियुक्त किया था। 16 अक्टूबर 1951 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।

2- ख्वाजा नाजीमुद्दीनः ख्वाजा नाजीमुद्दीन भी मुस्लिम लीग से थे। लियाकत अली खान की हत्या के बाद नाजीमुद्दीन पाक के पीएम बने। नाजीमुद्दीन 17 अक्टूबर 1951 को पीएम बने थे। दो साल भी पूरे नहीं हुए थे जब गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद ने उन्हें पद से हटा दिया। वह 17 अप्रैल 1953 तक पद पर रहे।

3- मुहम्मद अली बोगराः बेहद कम चर्चित बोगरा ने ख्वाजा नाजीमुद्दीन को रिप्लेस किया। तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद ने 1954 में सरकार को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद हुए चुनावों में हालांकि मुस्लिम लीग को शिकस्त मिली लेकिन गठबंधन की सरकार में मुहम्मद अली बोगरा को पीएम की कुर्सी सौंपी गई। 17 अप्रैल 1955 को बोगरा पीएम बने। इसके बाद बहुमत के अभाव में सरकार चल नहीं सकी और 4 महीने से भी कम वक्त में सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।

4- चौधरी मुहम्मद अलीः अली ने 1955 के बाद पीएम पद संभाला। 1956 में गठित हुए पाकिस्तान के संविधान में उनकी अहम भूमिका रही थी। लेकिन 1956 में राष्ट्रपति से विवाद की वजह से उन्होंने पद से त्यागपत्र से दिया।  

5- हुसैन शाहीद सुहरावर्दीः 12 सितंबर 1956 के दिन सुहरावर्दी पीएम बने। वह आवामी लीग के नेता थे और 1954 में पार्टी का नेतृत्व कर जीत दिलाई। वह मुस्लिम लीग के अलावा दूसरी किसी पार्टी के पहले ऐसे नेता थे जो पीएम पद पर पहुंचे थे। उन्हें भी राष्ट्रपति इसकंदर मिर्जा से विवाद की वजह से 1957 में पद छोड़ना पड़ा। वह 17 अक्टूबर 1957 तक इस पद पर रहे।

6- इब्राहीम इस्माइल चुंद्रीगरः सुहरावर्दी के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने चुंद्रीगर को इस पद के लिए चुना। 17 अक्टूबर 1957 को वह प्रधानमंत्री बने। वह दो महीने तक इस पद पर रहे। 16 दिसंबर 1957 को उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया।

7- फिरोज खान नूनः 16 दिसंबर 1957 को नून देश के प्रधानमंत्री बने। वह पाकिस्तान के सातवें प्रधानमंत्री थे। वह यूं तो एक छोटी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी के नेता थे लेकिन उनका प्रभाव बेहद जबर्दस्त था। 4 प्रधानमंत्रियों की बर्खास्तगी के बाद राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने अपनी ही पार्टी के चेयरमैन को इस पद पर बिठाया। लेकिन 7 अक्टूबर 1958 में मार्शल लॉ लागू होने के बाद उन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया।

8- अयूब खानः 24 अक्टूबर 1958 को अयूब खान पाकिस्तान के पीएम बने। वह 28 अक्टूबर 1958 तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने देश में मार्शल लॉ लागू किया था लेकिन अयूब ने इस्कंदर मिर्जा से जबरन इस्तीफा दिला दिया। यह देश का पहला सैन्य तख्तापलट था। 1958 की इस तारीख से लेकर 1971 तक देश में कोई प्रधानमंत्री नहीं था। देश सैन्य शासन के अधीन था।

 पहला मार्शल लॉ और दूसरा जनतंत्र (1958-1973) 1958 में सैन्य तख्तापलट के बाद अयूब खान देश के राष्ट्रपति बने। उनके शासनकाल में देश में कोई प्रधानमंत्री नहीं था। 1962 में नए संविधान के लागू होने के बाद, प्रधानमंत्री का पद आधिकारिक रूप से हट गया। हालांकि इस संविधान को भी 1969 में अयूब खान के इस्तीफे के बाद सस्पेंड कर दिया गया। फिर से मार्शल लॉ की वापसी हुई। नए राष्ट्रपति जनरल याहया खान ने नुरूल अमीन को प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त किया, वो भी अपने शासन के अंतिम दिनों में। उनके पद से हटने के बाद राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने अमीन को उपराष्ट्रपति बना दिया। 1973 तक देश में प्रधानमंत्री का पद नहीं लौट सका था।

9- जुल्फिकार अली भुट्टोः 14 अगस्त 1973 को जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। 1973 का संविधान लागू होने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के लिए राष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया। इसके बाद देश में संसदीय व्यवस्था की शुरुआत हुई। देश के दूसरे सैन्य तख्तापलट में 1977 में जनरल मुहम्मद जिया उल हक ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया। वह 5 जुलाई 1977 तक इस पद पर रहे।

10- मुहम्मद खान जुनेजोः जुनेजो 24 मार्च 1985 को प्रधानमंत्री बने। वह देश के 10वें प्रधानमंत्री थे। नॉन पार्टी बेस्ड इलेक्शन में 1985 में वह पीएम बने। उनका चुनाव एक इंडिपेंडेंट टिकट पर हुआ लेकिन उन्होंने बाद में वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग से जुड़ गए। संविधान में आठवें संशोधन के बाद राष्ट्रपति ने उन्हें हटा दिया।

11- बेनजीर भुट्टोः 2 दिसंबर 1988 को बेनजीर देश की प्रधानमंत्री बनीं। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की नेता भुट्टो देश की पहली महिला थीं जिन्होंने 1982 में देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व किया। 6 साल बाद, वह इस मुस्लिम राष्ट्र की पहली प्रधानमंत्री बनीं। कराची में हिंसा से हालात बिगड़ गए। जिसके बाद राष्ट्रपति ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया। वह 6 अगस्त 1990 तक इस पद पर रहीं। गुलाम मुस्तफा जतोईः 6 अगस्त 1990 को जतोई देश के पीएम बने। राष्ट्रपति गुलाम इशहाक खान ने उन्हें कार्यवाहक पीएम के तौर पर नियुक्त किया था। वह 6 नवंबर 1990 तक पद पर रहे।

12- नवाज शरीफः नवाज शरीफ पाकिस्तान के 12वें प्रधानमंत्री थे। 6 नवंबर 1990 को वह देश के पीएम बने। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज की सरकार को राष्ट्रपति गुलाम इशक खान ने अप्रैल 1993 में डिजॉल्व कर दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से नवाज की सरकार को बहाल किया। बलख शेर मजारीः बलख शेर मजारी 18 अप्रैल 1993 को देश के प्रधानमंत्री बने। उन्हें राष्ट्रपति ने कार्यवाहक पीएम के रूप में नियुक्त किया था। वह 26 मई 1993 तक वह इस पद पर रहे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवाज सरकार की बहाली के आदेश के बाद उनका कार्यकाल खत्म हो गया।

13- नवाज शरीफः 26 मई 1993 को नवाज फिर से देश के पीएम बने। राष्ट्रपति ने उन्हें आर्टिकल 58-2बी के तहत पद से हटा दिया था। अप्रैल 1993 में उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। नवाज का यह दूसरा कार्यकाल 2 महीने भी नहीं चल सका। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

14- मोइनुद्दीन अहमद कुरैशीः 18 जुलाई 1993 को कुरैशी को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। 19 अक्टूबर 1993 तक वह इस पद पर रहे।

15-  बेनजीर भुट्टोः 19 अक्टूबर 1993 को बेनजीर भुट्टो दूसरी बार देश की प्रधानमंत्री बनीं। 1995 में वह सैन्य तख्तापलट की कोशिश में बच गई। हालांकि राष्ट्रपति ने उनकी सरकार को 5 नवंबर 1996 को बर्खास्त कर दिया।  

16- मलिक मेराज खालिदः खालिद को 5 नवंबर 1996 को राष्ट्रपति ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया। वह 17 फरवरी 1997 तक इस पद पर रहे।

17- नवाज शरीफः पाकिस्तान में फरवरी 1997 के चुनावों में जबर्दस्त जीत के बाद नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बने। 17 फरवरी 1997 को उन्होंने कार्यभार संभाला। हालांकि 3 फरवरी 1997 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने उन्हें सत्ता से हटाकर देश की सत्ता हथिया ली। इसके बाद मुशर्रफ ने पूरे देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया।

18- जफरुल्लाह खान जमालीः जमाली 21 नवंबर 2002 को देश के पीएम बने। उन्होंने मुशर्रफ की विदेश और आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया। वह भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और 26 जून 2004 को पद से इस्तीफा दे दिया।

19- शुजात हुसैनः जमाली के इस्तीफे के बाद हुसैन प्रधानमंत्री चुने गए। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता हुसैन 30 जून 2004 को प्रधानमंत्री के पद पर बैठे और 3 महीने से भी कम समय 20 अगस्त 2004 तक ही सत्ता पर कायम रहे।  

20- शौकत अजीजः 20 अगस्त 2004 को शौकत अजीज ने पीएम की कुर्सी संभाली। संसदीय टर्म खत्म होने के बाद 16 नवंबर 2007 को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। संसदीय टर्म पूरा होने के बाद इस्तीफा देने वाले वह पाकिस्तान के पहले पीएम बने।

21- मुहम्मद मियां सूमरोः सूमरो ने 16 नवंबर 2007 को कार्यवाहक पीएम के तौर पर सत्ता संभाली। वह 25 मार्च 2008 तक पद पर रहे।

22- यूसुफ रजा गिलानीः 25 मार्च को गिलानी देश के पीएम बने। वह सबसे लंबी अवधि तक पीएम रहने वाले एकमात्र नेता हैं। हालांकि कोर्ट की अवमानना के मामले में अप्रैल 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने इस पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

23- राजा परवेज अशरफः परवेज अशरफ ने 22 जून 2012 को पीएम की कुर्सी संभाली। वह एक साल से भी कम वक्त तक पद पर रहे। 25 मार्च 2013 को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। मीर हजर खान खोसोः खोसो की नियुक्ति इलेक्शन कमिशन ऑफ पाकिस्तान ने 24 मार्च 2013 को की। 25 मार्च 2013 को खोसो ने पीएम की कुर्सी संभाली। वह तीन महीने से भी कम वक्त तक पद पर रहे। उनका कार्यकाल 5 जून 2013 तक रहा।

24- नवाज शरीफः नवाज शरीफ तीसरी बार पीएम की कुर्सी पर जून 2013 में पहुंचे। चुनावों में जबर्दस्त जीत के बाद 5 जून 2013 को उन्होंने सत्ता संभाली। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हालांकि इस बार भी वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। ‘पंजाब का शेर’ कहे जाने वाले नवाज शरीफ रिकॉर्ड तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। पहली बार राष्ट्रपति कार्यालय के जरिए, दूसरी बार सेना और अब न्यायापालिका द्वारा उनको सत्ता से बेदखल किया गया। 28 जुलाई 2017 को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पद के अयोग्य ठहरा दिया और उनके मामले को सुनवाई के लिए भ्रष्टाचार रोधी अदालत के पास भेज दिया। कोर्ट के फैसले के बाद नवाज शरीफ ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया।


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