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हरियाणा में बना देश का सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल, मिलेगी बीमारियों से निजात

देश में लगातार बीमारियां के केस बड़ते जा रहे हैं। इस लिहाज से अब एक रात की खबर आ रही है। जी हां, आपको बता दें कि हरियाणा के झज्जर स्थित देश के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल-नैशनल कैंसर इंस्टिट्यूट में मंगलवार से OPD (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाएं शुरू होने जा रही है। अस्पताल के OPD ब्लॉक का निर्माण हो चुका है और बुनियादी उपकरण इंस्टॉल किए जा चुके हैं। OPD सेवाएं शुरू होने से एक दिन पहले सोमवार को स्टाफ आखिरी तैयारियों में लगा हुआ था।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 दिसंबर): देश में लगातार बीमारियां के केस बड़ते जा रहे हैं। इस लिहाज से अब एक रात की खबर आ रही है। जी हां, आपको बता दें कि हरियाणा के झज्जर स्थित देश के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल-नैशनल कैंसर इंस्टिट्यूट में मंगलवार से OPD (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाएं शुरू होने जा रही है। अस्पताल के OPD ब्लॉक का निर्माण हो चुका है और बुनियादी उपकरण इंस्टॉल किए जा चुके हैं। OPD सेवाएं शुरू होने से एक दिन पहले सोमवार को स्टाफ आखिरी तैयारियों में लगा हुआ था। यह पिछले कई दशकों में भारत का सबसे बड़ा पब्लिक फंड से बना हॉस्पिटल प्रॉजेक्ट है। इसे 2035 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। गौरतलब है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी कि एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया को यह अस्पताल चलाने का जिम्मा सौंपा गया है। उन्होंने बताया है कि 710 बेड्स के इस अस्पताल का निर्माण कार्य खत्म हो गया है। उन्होंने बताया, 'हम सोमवार से OPD सेवाओं का सॉफ्ट लॉन्च कर रहे हैं। मध्य जनवरी से पब्लिक के लिए इंडोर ऐडमिशन भी कुछ चरणों में शुरू कर दिए जाएंगे।'आपको बता दें कि NCI तीन चरणों में शुरू होगा। पहला चरण जनवरी-मार्च 2019 क बीच शुरू होगा जिसमें OPD और 250 बेड होंगे। उसके बाद दिसंबर 2019 में इंडोर ऐडमिशन को 500 बेड तक के लिए बढ़ा दिया जाएगा। इसके एक साल के बाद यह पूरी तरह से संचालित होने लगेगा। अधिकारियों ने बताया है कि पहले चरण के लिए 634 डॉक्टर, नर्स और टेक्नीशन्स चाहिए, जिनमें से 110 को नियुक्त कर लिया गया है और बाकी स्टाफ को रखा जा रहा है।मीडिया रिपोर्टस के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक NCI AIIMS के कैंसर अस्पताल का बोझ बांटने का काम करेगा। AIIMS फिलहाल हर दिन 1300 मरीज देखता है। डॉक्टर बताते हैं कि सुविधाओं के अभाव के चलते इनमें से सिर्फ 400 को इलाज मिल पाता है। झज्जर परिसर मुख्य AIIMS से करीब 50 किमी दूर है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे दोनों परिसरों के बीच सेवाओं का समन्वय करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने के बारे में प्लान बना रहे हैं। जैसे दोनों ही परिसरों के लिए मरीजों को एक यूनीक आईडी दी जाएगी।


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