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कर्नाटक संकट में आया दिलचस्प मोड़, कुमारस्वामी सरकार के शक्ति परीक्षण पर गहराया सस्पेंस

कर्नाटक संकट में बेहद दिलचस्प मोड़ आ गया है। कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा के स्पीकर से कहा कि वह पहले बागी विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लें

kumaraswamy के जे श्रीवत्सन, न्यूज 24 ब्यूरो, बेंगलुरू (17 जुलाई): कर्नाटक संकट में बेहद दिलचस्प मोड़ आ गया है। कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा के स्पीकर से कहा कि वह पहले बागी विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लें। कोर्ट ने कहा कि स्पीकर अपनी मर्जी के मुताबिक जो भी फैसला करना चाहते हैं, वह करें। इसके लिए समयसीमा की बाध्यता नहीं है। कोर्ट के इस आदेश से कर्नाटक विधानसभा में कल होने वाली सीएम कुमारस्वामी सरकार के शक्ति परीक्षण पर सस्पेंस गहरा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की एचडी कुमारस्वामी सरकार बच पाएगी या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने गेंद स्पीकर के पाले में डाल दी है, ऐसे में ना तो विधायकों के इस्तीफे पर फैसला हो पाया और ना ही अयोग्यता पर। ऐसे में ये खेल पूरी तरह से फ्लोर टेस्ट पर निर्भर हो गया है।

सत्तारूढ़ गठबंधन को विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन है। इसमें कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37, बीएसपी के 1 और एक मनोनीत विधायक शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का भी एक मत होता है। दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 225 सदस्यों वाली विधानसभा में विपक्षी बीजेपी को 107 विधायकों का समर्थन हासिल हैं। अगर 16 बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो सत्तारूढ़ दल अल्पमत में आ जाएगा। कर्नाटक पर चल रहे विवाद के बीच बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके पास नंबर हैं और मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे।

कर्नाटक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि स्पीकर को खुली छूट है कि वह नियमों के हिसाब से फैसला करें। फिर चाहे वो इस्तीफे पर हो या फिर अयोग्यता पर हो। इस लिहाज से गुरुवार को होने वाला फ्लोर टेस्ट होकर रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि बागी विधायकों पर विधानसभा में जाने को लेकर कोई दबाव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा के स्पीकर से कहा कि वह पहले बागी विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लें। कोर्ट ने कहा कि स्पीकर अपनी मर्जी के मुताबिक जो भी फैसला करना चाहते हैं, वह करें। इसके लिए समयसीमा की बाध्यता नहीं है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 14 महीने पहले बनी कुमारस्वामी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। विधायकों द्वारा दायर इस याचिका में कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की गई थी। ऐसे में 18 जुलाई को कर्नाटक की विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा।


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