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शहीद की यह बेटी चाहे शांति, 'युद्ध अब और नहीं'

नरिंदर नंदन, जालंधर (3 मई): 'युद्ध अब और नहीं' दरअसल ये गुहार है एक बेटी की, जिसके पिता करगिल युद्ध में शहीद हो गए। लेकिन पिता की शहादत ने बेटी के ज़हन में नफरत का ज़हर नहीं भरा, बल्कि उसे मोम बना दिया।

शहीद की ये बेटी अब शांति का संदेश दे रही है। उसके खामोश पैगाम की गूंज बम-बंदूकों के शोर पर भारी पड़ रही है। उसका संदेश सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हम बात कर रहे हैं शहीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी गुरमेहर की। जालंधर में रहने वाली गुरमेहर कौर कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी है। साल 1999 में पिता की शहादत के वक्त गुरमेहर महज 2 साल की थी और अब 19 साल की हो चुकी हैं। युद्ध की आग कैसे किसी परिवार की खुशियां जला देती है, गुरमेहर बखूबी जानती हैं। लिहाज़ा गुरमेहर ने तय किया कि भारत-पाक को युद्ध के दंश से बचाने के लिए अमन का पैगाम दिया जाए।

अमन का पैगाम लोगों तक पहुंचाने के लिए गुरमेहर ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। ज़ुबान से कुछ नहीं कहा छोटी-छोटी सफेद तख्तियों पर शब्दों के ज़रिए अपना दिल खोल कर रख दिया। शांति के इस संदेश में गुरमेहर युद्ध को नकारने, आपस में भाईचारा और प्यार का माहौल बनाने की गुजारिश करती नजर आती हैं। वीडियो की शुरुआत में गुरमेहर खुद का परिचय देती है, वो बताती है कि वो कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन की बेटी हैं और इसके बाद गुरमेहर दोनों देशों की सरकारों से युद्ध ना करने की अपील करती नजर आती हैं।

प्लेकार्ड के जरिए गुरमेहर कौर कहती हैं कि पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, मेरे पिता को युद्ध ने मारा। मैं अपने पिता की तरह एक सैनिक हूं, जो भारत-पाक के बीच शांति के लिए लड़ रही हूं। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध नहीं होता तो मेरे पिता जिंदा होते। मैं ये वीडियो इसलिए बना रही हूं ताकि दोनों देश आपस की समस्या को खत्म करें। दो विश्व युद्धों के बाद फ्रांस और जर्मनी दोस्त बन सकते हैं। अगर जापान और अमेरिका इतिहास को छोड़कर विकास के लिए साथ आ सकते हैं, तो हम क्यों नहीं। भारत पाकिस्तान की बहुत बड़ी आबादी युद्ध नहीं शांति चाहती है। मैं दोनों देशों के नेताओं की काबिलियत पर सवाल उठा रही हूं। दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ बात करनी चाहिए। सरकार प्रायोजित आतंकवाद बहुत हो चुका अब दोनों देशों के बहुत से लोग अब तक मारे जा चुके हैं। मैं एक ऐसी दुनिया की इच्छा करती हूं, जहां कोई गुरमेहर कौर नहीं हो, जिसके पिता उसके पास न हो।

इस तरह खामोश रह कर शांति का संदेश देने की प्रेरणा गुरमेहर को फेसबुक पर हो रही एक बहस के दौरान मिली। गुरमेहर शांति का संदेश देने के लिए वीडियो बनाने का ख्याल आया ताकी भारत-पाक के बीच नफरत को कम किया जा सके। बहरहाल गुरमेहर की ये कोशिश भारत-पाक शांति की दिशा में एक और पहल है। मकसद केवल ये पैगाम देना है कि युद्ध अब और नहीं, लेकिन बम-बंदूक के शोर में खामोशी से दिए गए इस शांति संदेश को कोई सुनेगा ये एक बड़ा सवाल है।

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