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"जेएनयू विवाद ‘देश तोड़ो’ और ‘देश जोड़ो’ की सोच का टकराव"

नई दिल्ली (17 फरवरी): केंद्रीय संसदीय राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जेएनयू व दूसरे स्थानों पर देशविरोधी गतिविधियां ‘देश तोड़ो’ और ‘देश जोड़ो’ की सोच और संस्कृति के बीच संघर्ष है।

नकवी ने कहा कि जेएनयू में कुछ छात्रों का देशविरोधी कृत्य दुनिया में भारत की छवि खराब करने की साजिश है। देश को तोडऩे या समाज की शांति और सौहार्द के माहौल को खराब करके देश की समृद्धि को नुकसान पहुंचाने की साजिश को कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली में भारत-अफ्रीका सम्मेलन के दौरान तथाकथित असहिष्णुता का मुद्दा उठाकर और अवॉर्ड वापसी के ड्रामा करके देश को बदनाम करने की कोशिश की गयी। अब जब मेक इन इंडिया पहल के तहत दुनियाभर के उद्योगपति मुंबई में जुटे हैं तब देश विरोधी काम कर भारत की छवि को दुनियाभर में धूमिल करने की साजिश चल रही है। ऐसे तत्व देश की तरक्की में रोड़ा अटकाना चाहते हैं।

नकवी ने कहा कि कुछ लोग और राजनीतिक दल देशद्रोहियों की साजिश का समर्थन कर रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है। देश की एकता और अखंडता जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए सबको एकजुट होकर उन ताकतों के खिलाफ लडऩा होगा जो देश के हितों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से काम कर रही है। भाजपा नेता ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को जातपात, धर्म और राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से तथाकथित असहिष्णुता के मुद्दे पर देश के लोगों को भ्रमित करने में नाकाम रहने के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य राजनीतिक दल अब शैक्षणिक संस्थानों का अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं। ये पार्टियां शैक्षणिक संस्थानों को अपनी संकीर्ण राजनीति का अखाड़ा बनाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गई अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर राष्ट्रविरोध की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती है।   अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को चुनौती दे। अफजल गुरु जैसे आतंकवादी को कानून के तहत फांसी दी गई है, ऐसे व्यक्ति के समर्थन में नारे लगाना किस तरह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। देश विरोधी का समर्थन करना क्या देशद्रोह नहीं है। कश्मीर की आजादी और भारत की बर्बादी के नारे लगाना क्या देशद्रोह नहीं है। जो दल राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन कर रहे हैं उन्हें देश की जनता से माफी मांगनी चाहिये।


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