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पठानकोट हमला पाकिस्तानी आतंकियों की कारस्तानी, जेआईटी ने माना

नई दिल्ली (1 अप्रैल): पाकिस्तान ने पठानकोट आतंकवादी हमले मामले में अपने रूख में बदलाव लाते हुए भारत द्वारा दिए गए सबूतों को स्वीकार कर लिया है कि इस हमले के दोषी पाकिस्तानी नागरिक थे। पठानकोट हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पाकिस्तान के संयुक्त जांच दल (जेआईटी) के साथ सबूत साझा किए।

एनआईए के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि हमले के सुबूतों को लेकर पाकिस्तानी जेआईटी के सदस्यों में मतभेद था लेकिन अब वो सब भारत के सुबूतों पर एकराय हो गये हैं। पाकिस्तानी जेआईटी ने कहा है कुछ सुबूतों से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

एनआआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि  उन्हें चार आतंकवादियों की पोस्टमार्टम और डीएनए रिपोर्ट भी सौंपी जा चुकी है। आतंकवादियों के पास जो हथियार थे उन पर पाकिस्तान की मुहर थी। पाकिस्तान से कॉल ट्रेस की गई। इन सब बातों से पता चलता है कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे।

एनआईए ने साजिशकर्ताओं मौलाना मसूद अजहर उसके भाई राउफ असगर और आतंकियों के हैंडलर कासिफ जान के खिलाफ पुख्ता सबूत देते हुए कहा की ये तमाम सबूत पकिस्तान के कोर्ट के लिए भी मान्य हैं। इसके आधार पर पाकिस्तान दोषियों को सजा दिलाए। एनआईए के मुताबिक पकिस्तान में जो एफआईआर दर्ज की गई है वो भारत के एआआईआर से काफी मेल खा रही है।

पाकिस्तान मुंबई हमलों की तरह पठानकोट हमले में अपनी सरजमीं का इस्तेमाल किए जाने से इनकार करता रहा है, लेकिन भारत के ठोस सबूतों को स्वीकार करना उसकी बड़ी हार है। पाकिस्तानी जेआईटी और एनआईए के बीच जांच को लेकर बातचीत का आज चौथा दिन था।

जेआईटी पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर गत दो जनवरी को हुए आतंकवादी हमले से पहले नाटकीय ढंग से आतंकवादियों द्वारा अगवा किए जाने और फिर रिहा किए जाने वाले पंजाब पुलिस के विवादित अधिकारी सलविंदर सिंह समेत अन्य गवाहों से भी पूछताछ कर चुकी है। 


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