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देश के सबसे भारी रॉकेट GSLV मार्क-3 को लॉन्च के लिए तैयार

नई दिल्ली (28 मई): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO इतिहास रचने के लिए एक और कदम बढ़ाने जा रहा है। ISRO अब अपने सबसे भारी रॉकेट GSLV मार्क-3 को छोड़ने की तैयारी में जुट गया है। यह अब तक के सबसे वजनदार उपग्रहों को ले जाने में सक्षम है। भारत में विकसित करीब 200 बड़े एशियाई हाथियों के बराबर वजन वाला रॉकेट भारत की जमीन से भारतीयों को अंतरिक्ष में पहुंचा सकता है। इसरो द्वारा निर्मित यह अब तक का सबसे वजनी रॉकेट है, जिसका वजन 640 टन है। इस रॉकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रॉकेट के मुख्य व सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन को इसरो के वैज्ञानिकों ने भारत में ही विकसित किया है, जो पहली बार किसी रॉकेट को उड़ने की शक्ति प्रदान करेगा।

हालांकि GSLV मार्क-3 का यह पहला प्रायोगिक प्रक्षेपण है लेकिन अगर सबकुछ योजना के अनुरूप चलता है तो एक दशक या कम-से-कम आधा दर्जन सफल प्रक्षेपण के बाद इस रॉकेट को धरती से भारतीयों को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाले सबसे उपयुक्त विकल्प के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है। पहले यह रॉकेट मई के अंत में छोड़ा जाना था। सिवन के अनुसार, जून के प्रथम सप्ताह में GSLV मार्क-3 अपनी पहली उड़ान भरेगा। रॉकेट के साथ छोड़ा जाने वाला संचार उपग्रह जीसैट-19 लगभग 3.2 टन वजनी है। यह किसी घरेलू स्तर पर निर्मित रॉकेट से छोड़ा जाने वाला अब तक का सबसे वजनी उपग्रह होगा। प्रक्षेपण के लिए जीसैट-19 श्रीहरिकोटा पहुंच चुका है। इसरो के अनुसार, जीसैट-19 बहु-तरंगी उपग्रह है, जो का और कू बैंड वाले ट्रांसपोंडर्स अपने साथ लेकर जाएगा। इस उपग्रह की उम्र 15 वर्ष होगी। इसरो इससे पहले 2014 में बिना क्रायोजेनिक इंजन वाला इसी तरह का रॉकेट छोड़ चुका है, जो 3.7 टन भार ले जाने में सक्षम था।


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