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2.5 अरब के हीरे को लेकर 4 भारतीयों के खिलाफ वॉरंट

नई दिल्ली ( 15 अगस्त ): भारतीय मूल के चार व्यापारियों को 2.5 अरब की कीमत वाले बहुमूल्य गुलाबी हीरे को लेकर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। यह इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस दक्षिण अफ्रीका में जारी किया गया है। रूस के एक टेलिकम्युनिकेशन बिजनसमैन और हीरे के स्थानीय डीलर के बीच हीरे के स्वामित्व को लेकर दावे और फिर कानूनी विवाद के बीच यह नोटिस जारी हुआ है। 

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मूल के जुनैद मोती, उनके पिता अब्बास अबू बकर और उनके दो सहयोगियों अशरफ काका और सलीम बोबत ने रेड कॉर्नर नोटिस के खिलाफ प्रिटोरिया हाई कोर्ट का रुख किया। यह त्रिकोणीय कानूनी लड़ाई फ्रांस, लेबनान, जिम्बाब्वे और दुबई की अदालतों में दो सालों से चल रही है। 

रेड नोटिस, इंटरपोल द्वारा जारी किया जाने वाला इंटरनेशनल अलर्ट है। इसमें वांछित इंसान के प्रत्यर्पण के लिए उसकी लोकेशन और फिर गिरफ्तारी का प्रावधान है। चारों आरोपियों ने स्थानीय कोर्ट से इंटरपोल की वॉरंट पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है। उनके अनुसार रूसी बिजनसमैन अलीबेक इसाएव ने धोखाधड़ी से हीरे के कागजात हासिल किए हैं। 

भारतीय मूल के बिजनसमैनों और रूसी बिजनेसमैन ने एक-दूसरे पर हीरे को चुराने का आरोप लगाया है। हालांकि यह मामला उस समय और भी रोचक हो गया जब डायमंड डीलर सिल्ला मूसा ने 2003 में भारतीय मूल के व्यापरियों पर उसी हीरे को चुराने का आरोप लगाया। 

अशरफ काका ने बताया कि उनके सहयोगियों को मूसा ने आश्वस्ति पत्र दिया था, जिसमें हीरे को कर्ज की राशि के बदले में चुकाया गया बताया गया था। काका ने बताया कि लेबनान प्राधिकरण की तरफ से जारी इंटरपोल वारंट रूसी बिजनसमैन इसाएव ने फ्रॉड तरीके से जारी करवाया है। 


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