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'आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा और मूर्खों की मदद करता है इंटरनेट'

नई दिल्ली (7 जनवरी): ''आज के समय में सोशल मीडिया के कारण भीड़ के शासन को तुरंत अभिव्यक्ति मिलती है। इंटरनेट खतरनाक और लोकतांत्रिक दोनों मंच मुहैया कराता है।'' ये आज की दुनिया का सच तो है ही। लेकिन इसपर चिंता जताते हुए मोहर लगाई है नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने।

जी हां, मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक जाने माने विद्वान ने एक कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं। साल 2009 में रसायनशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए गए वी रामकृष्णन ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भीड़ तो इंटरनेट से पहले भी हुआ करती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया के कारण भीड़ का शासन कहीं ज्यादा तेजी से अभिव्यक्त होता है। मेरे लिए तो यह एक खतरा है। भीड़ की अपनी चाल होती है। एक कार्यक्रम में रामकृष्णन ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन, डेविड ट्रिंबल और ऑर्थर मैक्डोनाल्ड से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। वे इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि क्या इंटरनेट लोकतांत्रिक और खतरनाक दोनों है।

रामकृष्णन ने इंटरनेट पर सरकारी बंदिशों की भूमिका के बारे में कहा, ''इंटरनेट हर तरह के मूर्खों को मदद करता है। इसमें बदतमीजी करने वाले भी होते हैं। आतंकवादियों को साथ आने के मौके मिलते हैं। वे खतरनाक और असामाजिक व्यवहारों का प्रचार-प्रसार करते हैं और फिर सरकार को सेंसरशिप और निजता, इंटरनेट के प्रवाह पर सख्ती से पेश आना पड़ता है।''

कार्यक्रम में दूसरे नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा, ''हर सरकार अगला चुनाव जीतना चाहती है, लिहाजा यह देखकर थोड़ी निराशा हो जाती है कि वह किस तरह की बातचीत या संवाद को बढ़ावा दे रही है।"


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