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प्रणब दा पर बहुत भरोसा करती थीं इंदिरा, हारने के बाद भी बनाया था मंत्री

 

नई दिल्ली (19 नवंबर): राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 1980 में लोकसभा चुनाव इंदिरा गांधी की इच्छा के खिलाफ लड़ा था। उस चुनाव में हार के बाद इंदिरा ने उन्हें जमकर फटकार लगाई थी लेकिन पराजय के बावजूद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दे दी थी। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी के सत्ता में लौटने के दिनों की तमाम घटनाओं का मुखर्जी ने अपनी किताब "द ड्रामेटिक डिकेड : द इंदिरा गांधी ईयर्स" में विस्तार से उल्लेख किया है। रूपा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का हाल ही में विमोचन हुआ है।

'आयरन लेडी' के नाम से चर्चित इंदिरा गांधी प्रणब मुखर्जी पर इतना ज्यादा भरोसा करती थीं कि दिवंगत नेता एपी शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं के रहते हुए उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाया। अब राष्ट्रपति बन चुके मुखर्जी ने उसे कल्पना व बकवास करार दिया कि उन्हें कैबिनेट में इस वजह से जगह मिली थी कि इंदिरा गांधी तब अपनी कैबिनेट को ज्योतिषीय शुभ संख्या 22 सदस्यीय रखना चाहती थीं।

राष्ट्रपति ने लिखा है, वर्ष 1980 के चुनाव मे इंदिरा अपनी चुनावी जीत के प्रति इतना अधिक आश्वस्त थीं कि जब लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मैं कांग्रेस के वफादार उम्मीदवारों का चयन कर रहा था तब उन्होंने मुझे सलाह दी थी कि ऐसे लोगों का चयन करूं कि जो सरकार चला सकें। मुखर्जी ने लिखा है, उन्होंने वर्ष 1980 में मुझे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की सख्त लहजे में सलाह दी थीं लेकिन मेरे जोर देने पर उन्होंने टिकट दे दिया था। मैं भोलपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था और 68 हजार 629 मतों से हार गया था। मुझे शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।

जब चुनाव परिणाम आया तब तक उनकी पत्नी गीता दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी थीं। उसी दिन उन्होंने फोन किया कि इंदिरा गांधी मुझसे मिलना चाहती हैं। मैं शाम की फ्लाइट से दिल्ली चला आ आया और सीधे इंदिरा गांधी के आवास पर गया। संजय गांधी ने मुझे बताया था कि जब से मेरी हार की खबर उन्होंने सुनीं हैं, तब से बहुत आहत हैं। रात के करीब नौ बजे थे। इंदिरा गांधी लंबी डाइनिंग टेबल की उस तरफ बैठी थीं। सर्दी की रात थी और वह गर्म पानी के टब में पैर डाले हुए थीं। तब मुझे उन्होंने स्पष्ट रूप से फटकारा था। मुझे उनकी सलाह के खिलाफ बोलपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के फैसले पर डांट लगी थी। मुझे कहा गया था कि ऐसे अविवेकपूर्ण फैसलों ने मेरे सभी मेहनत पर पानी फेर दिया है। मैं उनके शांत होने तक वहां सिवा खड़ा रहने के कुछ कर नहीं सकता था। बाद में मुझे एक टोकरी फल के साथ घर भेज दिया गया। संजय गांधी ने मुझे फोन कर बताया कि उन्हें यह जानकार दुख हुआ है कि सरकार में शामिल नहीं होने की आशंका को लेकर मैं दुखी हूं। मैंने उन्हें बताया कि उन्हें गलत जानकारी दी गई है। इस पर संजय गांधी ने मुझसे कहा, यह पहले से ही तय है कि आपको कैबिनेट मंत्री के रूप में वाणिज्य मंत्री बनाया जाएगा।


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