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जब इंदिरा ने तोड़ा पाक का घमंड, बदल दिया भूगोल

नई दिल्ली (20 नवंबर): इंदिरा गांधी का नाम आते ही एक ऐसी छवि सामने उभरकर आती है, जिसने कभी कड़े फैसले लेने से कभी परहेज नहीं किया। उनके ही कड़े फैसलों की बदौलत बांग्‍लादेश का अस्तित्‍व भी मौजूद है।

पाकिस्तान के तानाशाह याहया खान ने 25 मार्च 1971 को पूर्वी पाकिस्तान (बांग्‍लादेश) की जनभावनाओं को सैनिक ताकत से कुचलने का आदेश दे दिया था। इसके बाद शेख मुजीद गिरफ्तार कर लिए गए। पूर्वी पाकिस्तान से शरणार्थी भारत आने लगे।

3 दिसंबर 1971 को इंदिरा कोलकाता में एक जनसभा कर रहीं थी। उसी शाम को पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों ने भारतीय वायु सीमा पार कर पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर और आगरा के सैनिक हवाई अड्डों पर बमबारी कर दी। इंदिरा ने ठान लिया कि पाकिस्तान को सबक सिखाना है।

भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। 13 दिन में लड़ाई खत्म हो गई। 16 दिसंबर को हमारी सेना ने पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को बंदी बना लिया। इंदिरा ने पाकिस्तान का इतिहास ही नहीं, भूगोल भी बदल दिया। पूर्वी पाकिस्तान आजाद हो गया और इंदिरा की पहल पर बांग्लादेश नाम से नया देश बना, जिसके राष्ट्रपति बने शेख मुजिबिल रहमान। उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा को दुर्गा का अवतार तक कहा था।


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