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अब भारतीय तकनीक से सुरक्षाकर्मियों को मिलेगा विश्वस्तरीय बुलेट प्रूफल जैकेट

नई दिल्ली (5 जून):  देश की रक्षा के लिए दिन-रात सीमा पर डटे रहने वाले भारतीय सेना के जवान कभी अपनी जान की परवाह नहीं करते और करोड़ों लोगों की जिंदगी की हिफाजत करते हुए खुद शहादत को गले लगा लेते हैं। लेकिन अब देश ही हिफाजत में जुटे सुरक्षाकर्मियों को जल्द ही विश्वस्तरीय बूलेट प्रूफ जैकेट मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने बंगाली वैज्ञानिक शांतनु भौमिक द्वार डिजायन किए गए बूलेट प्रूफ जैकेट को मंजूरी दे दी है। इन जैकेट्स को प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना मेक इन इंडिया के तहत बनाया जाएगा।

प्रो. शांतनु भौमिक भारतीय रक्षा अनुसंधान केंद्र यानी DRDO के साथ मिलकर इन बुलेट प्रूफ जैकेट को बनाएंगे। ये जैकेट्स पूरी तरह से भारतीय टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसका वजन भी काफी कम होगा। साथ ही ये सस्ता भी होगा। फिलहाल भारत के एक बुलेट प्रूफ जैकेट पर 1.5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं भारतीय टेक्नोलॉजी से बनने बाले एक जैकेट पर तकरीबन 50 हजार यानी एक तिहाई खर्ज आएगा। इस तरह भारत हर साल तकरीबन 20,000 करोड़ रुपये की बचत कर सकेगा। फिलहाल भारतीय सुरक्षाकर्मियों को जो बुलेट प्रूफ जैकट मिलता है उसका वजन 15 से 18 किलो के बीच होता है। जबकि नए जैकेट का वजन महज 1.5 से 2 किलो के बीच होगा। और इसे पहनकर सुरक्षाकर्मी 57 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी काम कर सकेंगे।


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