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सबसे बड़ा खुलासा: आपका रेल टिकट बुक क्यों नहीं होता ?

जब भी ट्रेन (Train) से सफर करना हो तो सबसे बड़ी टेंशन कन्फर्म टिकट की होती है, क्योंकि लाख कोशिशों को बाद भी किसी को कंफर्म टिकट (Confirm Ticket) मिलने की उम्मीद नहीं रहती। हजारों बार शिकायतें हुई, सैकड़ों बार दावे हुए लेकिन नतीजा

Indian railway, इंडियन रेलवे

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(22 जनवरी): जब भी ट्रेन (Train) से सफर करना हो तो सबसे बड़ी टेंशन कन्फर्म टिकट की होती है, क्योंकि लाख कोशिशों को बाद भी किसी को कंफर्म टिकट (Confirm Ticket) मिलने की उम्मीद नहीं रहती। हजारों बार शिकायतें हुई, सैकड़ों बार दावे हुए लेकिन नतीजा निकलता तो कैसे, क्योंकि आपके हक की टिकट पर आतंकी मोटा मुनाफा कमा रहे थे। जी हां, IRCTC के जरिए बुक होने वाली टिकट की कालाबाजारी का सबसे बड़ा खुलासा हो चुका है। पुलिस के हत्थे एक गिरोह चढ़ा तो राज़ फाश होते चले गए। काली कमाई, आतंकी फंडिंग, कई विदेशी मुल्क और सॉफ्टवेयर कंपनी जैसे कई लिंक बेनकाब हो चुके हैं।

रेल टिकट को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरपीएफ ने रेलवे में ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री से जुड़े ऐसे इंटरनेशनल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार दुबई, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सिंगापुर और यूगोस्लाविया में हवाला और मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग से जुड़े हैं। गिरोह का सरगना दुबई में बैठा है जबकि भारत में बेंगलुरु से इस गिरोह का कंट्रोल होता था। जांच एजेंसियों ने ई-टिकट बुकिंग साफ्टवेयर बेचने वाले गुलाम मुस्तफा समेत 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब IB और NIA ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है।

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने टिकट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह का सरगना कम पढ़ा लिखा है। इस गिरोह में इस शख्स को गुरुजी के नाम से जाना जाता था। टिकट कालाबाजारी से शुरुआत की और ट्रेनिंग लेकर सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गया। यह गिरोह पिछले पांच साल से सक्रिय है और लगभग 1000 करोड़ रुपये कमा चुका था। आरपीएफ के मुताबिक यह गैंग कई बार 85 फीसदी टिकट अकेले ही बुक कर लेता था, जिन्हें मनमाने दामों पर यात्रियों को दिया जाता था।

गिरोह के सरगना झारखंड के गिरिडीह निवासी गुलाम मुस्तफा को भुवश्नेश्वर से गिरफ्तार किया था। उसके साथ 27 लोगों को और पकड़ा गया है। जांच पड़ताल में गुलाम मुस्तफा के पास से आईआरसीटीसी के 563 निजी आईडी पाए गए हैं। लेकिन इस सॉफ्टवेयर को बनाने और पूरे खेल के मास्टर माईंड गुरुजी को लेकर पुलिस की तलाश अब भी जारी है।

HEADER -कैसे काम करता था गिरोह ?

कालाबाजारी के लिए ANMS  का एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया।

ANMS सभी बैरियर तोड़ कर कम वक्त में टिकट बुक करता था।

एक आम यात्री को एक टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया में तीन मिनट का वक्त लगता है।

इस गिरोह ने ऐसा साफ्टवेयर बनाया है, जिससे एक मिनट में तीन टिकट बुक हो जाते हैं।

- इस सॉफ्टवेयर के जरिए CAPTCHA और OTP दर्ज करने की जरुरत नहीं पड़ती थी।

इस गिरोह में 20 हजार एजेंटों वाले 300 पैनल देश भर में सक्रिय।

- हर महीने 10 से 15 करोड़ रुपए कमाता था गैंग।

हर महीनों 15 करोड़ कमाना वाले ये गैंग इस पैसे को हिंदुस्तान के खिलाफ खड़े आतंकी संगठनों को मदद करने में करता था। कैश कमाने के बाद ये लोग इस रकम से टेरर फाइनैंसिंग करते थे। पूछताछ में ये पता चला है कि इस पूरे रैकेट के तार पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं। इस पूरे कालाबाजारी को हैंडल करने वाला दुबई में बैठा हामिद अशरफ मूलरूप से उत्तरप्रदेश का रहने वाला हैवह 2019 के गोंडा बम विस्फोट का आरोपी भी है। वर्ष 2016 में आरपीएफ ने हामिद अशरफ को टिकट की कालाबाजारी में गिरफ्तार किया था। 

तत्काल टिकटों की कालाबाजारी से वह हर माह 15 करोड़ रुपए दुबई में बैठे-बैठे पाता है। जिसके तार दुबई, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सिंगापुर और यूगोस्लाविया में हवाला और मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग से जुड़े हैंभारत में बेंगलुरु से इस गिरोह का कंट्रोल होता था। IRCTC के साइट को कंट्रोल कर उसके जरिए पैसे कमाने वाला मुखिया गुरुजी पुलिस की रडॉर पर है। जांच ऐजेंसियों की नजर एक सॉफ्टवेयर कंपनी पर भी है। इसी कंपनी इस काली कमाई का पैसा इंवेस्ट किया गया है। इस कार्रवाई पर ऐसी ही हरकतों के चलते सिंगापुर में भी इस पर कार्रवाई हो चुकी है।

इस गिरोह के आतंकी कनेक्शन के खुलासे के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), IB), प्रवर्तन निदेशालय, कर्नाटक पुलिस की SIT भी जांच में जुड़ गई हैं। गुलाम मुस्तफा से पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। गिरोह के पास फर्जी आधार कार्ड एवं फर्जी पैन कार्ड बनाने की तकनीक भी है और बंगलादेश से लोगों को अवैध रूप से लाने एवं यहां बसाने का काम भी कर रहा था। जाहिर है इस बड़े खुलासे के बाद हर कोई हैरान है। आम यात्री इस कार्रवाई से खुश है तो वहीं इस मामले के टेरर लिंक को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग भी कर रह है। ये पूरा मामले न सिर्फ करोड़ो हिंदुस्तानियों के पैसों और यात्रा से सीधा जुड़ा है बल्कि अब देश की सुरक्षा से भी लिंक हो चुका है यानि बात सिर्फ आपकी कन्फर्म टिकट की नहीं, आपकी जान की सुरक्षा के कंफर्म होने की भी है।


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