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ग्वादर में चीनी नौसेना के जहाजों का दिखना चिंता का विषय: नौसेना प्रमुख

नई दिल्ली ( 1 दिसंबर ): भारतीय नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान से सटे बंदरगाह पर चीनी सेना के युद्धपोतों की उपस्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा का कहना है कि भविष्य में पाकिस्तान के बंदरगाह शहर बलूचिस्तान में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के नौसेना जहाजों की उपस्थिति चिंता का विषय है।

भारतीय नौसेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान से सटे बंदरगाह पर चीनी सेना के युद्धपोतों का देखा जाना भारत की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के दृष्टिकोण से ये चिंता का विषय है।

एडमिरल लांबा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'भविष्य में यदि पीएलए नौसेना के जहाज ग्वादर में होंगे, तो यह चिंता का विषय होगा, हमें इस चिंता को कम करने के तरीकों के बारे में सोचना होगा।' लांबा ने बताया कि चीनी वाणिज्यिक कंपनियों ने ग्वादर में बहुमत में हिस्‍सेदारी हासिल कर ली है। यह एक वाणिज्यिक बंदरगाह है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का हिस्सा है। मैंने पासनी से पनडुब्बी संचालन के बारे में नहीं सुना है। उन्‍होंने यह भी कहा कि चीनी पीएलए नौसेना के आठ जहाज किसी भी समय हिंद महासागर क्षेत्र में मौजूद हैं। यहां 2008 में जहाजों की तैनाती शुरू हुई थी।

उन्‍होंने बताया, 'अगस्त के महीने में अनोखी स्थिति थी, क्योंकि इस क्षेत्र में 14 जहाज़ थे।' भारतीय नौसेना वहां भी तैनात पीएलए पनडुब्बियों की निगरानी करती है। पीएलए नौसेना ने 2013 में इन पनडुब्बियों की तैनाती शुरू कर दी थी। यहां दो पनडुब्बियां तैनात हैं, जो हर तीन म‍हीने में बदलती हैं। इस पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हम उनकी तैनाती की निगरानी करते हैं। हर 24 घंटे या 48 घंटे में इनकी निगरानी के लिए एक विमान जाता है।


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