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'भारतीय अर्थव्यवस्था अंधों में काना राजा जैसी, चीन से हम एक दशक पीछे'

वाशिंगटन (16 अप्रैल) :  भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन वक्त वक्त पर देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आईना दिखाते रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने ऐसा किया है। बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था को जहां कई बार ‘ग्‍लोबल इकोनमी में चमकता सितारा’ बताया जाता है। इस पर राजन की राय कुछ अलग है। राजन से जब उनकी राय मांगी गई तो उन्‍होंने कहा, ”मुझे लगता है कि हमें अभी भी वो जगह हासिल करनी है, जहां हम संतोष व्‍यक्‍त कर सकें। हमारे यहां एक कहावत है-अंधों के बीच काना राजा होता है। हम कुछ वैसे ही हैं।”

 इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड में चीफ इकोनॉमिस्‍ट और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्‍कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर रहे राजन ने वॉशिंगटन में यह बयान दिया। वे यहां वर्ल्‍ड बैंक और आईएमएफ की बैठक और जी20 देशों के वित्‍त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नरों की बैठक के लिए आए हैं। राजन को भारतीय व वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में खुलकर अपनी राय रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत में ‘बहुत सी अच्छी बातें हुई हैं’ लेकिन ‘कुछ काम अभी किए जाने हैं।’

मार्केटवॉच को दिए इंटरव्यू में राजन ने चालू खाते व राजकोषीय घाटे जैसे मोर्चे पर उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मु्द्रास्फीति 11 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत से नीचे आ गई है जिससे ब्याज दरों में गिरावट की गुंजाइश बनी है। उन्होंने कहा, "निसंदेह रूप से, ढांचागत सुधार चल रहे हैं। सरकार नयी दिवाला संहिता लाने की प्रक्रिया में है। वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) आना है। लेकिन अनेक उत्साहजनक चीजें पहले ही घटित हो रही हैं।"

जब राजन से चीन और भारत के बीच तुलना के लिए लिए कहा गया तो राजन ने कहा कि भारत सुधारों की प्रक्रिया को लेकर चीन से करीब एक दशक पीछे हैं और ये दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में झलकता है। हम उनके एक चौथाई या पांचवा हिस्सा है। अगर हम एक निश्चित समय तक सही चीज़ें करते हैं तो हम उन्हें पकड़ सकते हैं। 


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