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खत्म होंगे अंग्रेजों के जमाने के कानून, जल्द सामने आयेगा सेना का नया चेहरा

नई दिल्ली ( 31 अगस्त ): डोकलाम विवाद खत्म होने के तुरंत बाद भारतीय सेना की जंगी तैयारियों को बेहतर करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। भारतीय सेना में एक बड़े सुधार के तहत नॉन ऑपरेशनल जिम्मेदारियों में तैनात 57 हजार अफसरों और सैनिकों की नए सिरे से तैनाती होगी और उन्हें ऑपरेशनल भूमिकाओं में लगाया जाएगा। इसके अलावा सेना में सिविलियनों को उन भूमिकाओं में लगाया जाएगा, जिन्हें निभाने के लिए सैनिकों की जरूरत नहीं है। ब्रिटिश शासन के जमाने से चली आ रही कुछ ऐसी सैन्य संस्थाओं को खत्म किया जाएगा, जिनकी जरूरत आज के दौर में नहीं मानी जा रही है। 

सशस्त्र बलों की जंगी क्षमता बढ़ाने और रक्षा खर्चों को नए सिरे से बैलेंस करने के लिए मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में रक्षा मंत्रालय ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीबी शेकतकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाई थी। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट पिछले साल दिसंबर में सौप दी थी। रक्षा मंत्रालय ने कमिटी की 99 सिफारिशों को सशस्त्र बलों के पास भेजा, ताकि इन पर अमल की योजना बनाई जा सके। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने पहले चरण में इनमें से 65 सिफारिशों को मंगलवार को मंजूरी दे दी, ये सिफारिशें भारतीय सेना से जुड़ी हैं। मंत्रालय के इस फैसले की कैबिनेट को जानकारी दी गई। सरकार का मानना है कि इन सिफारिशों को लागू करने के दूरगामी नतीजे होंगे। 


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