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हिंद महासागर में चीन को ऐसे घेरेंगे भारत और अमेरिका

शैलश कुमार, नई दिल्ली (4 मई): हिंद महासागर में भारत का दबदबा है, लेकिन चीन अपने वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट के लिए हिंद महासागर को महत्वपूर्ण मानता है। इसीलिए आए दिन अपनी पनडुब्बियों को हिंद महासागर में भेजता रहता है। चीन की परमाणु पनडुब्बियां हिंदुस्तान की सुरक्षा के लिए तो खतरा है हीं लेकिन अमेरिका भी अब हिंद महासागर में चीन की बढ़ती भूमिका से चिंतित है। इसीलिए अब हिंदुस्तान और अमेरिका एंटी सबमरीन वॉर फेयर के लिए एक दूसरे को सहयोग करने वाले हैं।

हिंद महासागर पर इस वक्त चीन की सबसे बुरी नजर है। चीन अपने कंबैट शिप और पनडुब्बियां तैनात करने के लिए दलील देता है कि हिंद महासागर से होकर उसका बड़े कारोबारी जहाज गुजरते हैं। इसी बहाने चीन की पडुब्बियां सामरिक महत्व के अंडमान निकोबार में अक्सर आती रहती हैं। इससे भारत को सीधे तो खतरा नहीं हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक हिंदुस्तान को हर वक्त मालूम होना चाहिए कि चीन के जहाज और पानी के नीचे पनडुब्बियां हिंदमहासागर में कब और कहां हैं।

एक तरफ जहां अमेरिका चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति से चिंतित है तो वहीं दूसरी ओर चीन की पीएलए नेवी आए दिन अपनी पनडुब्बियों को चोरी छिपे हिन्द महासागर में भेजती रहती है, जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। इसी के मददेनज़र हिंदुस्तान और अमेरिका चीन की पनडुब्बियों पर नज़र रखने के लिए एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। चीन पर लगाम कसने के लिए अमेरिका हिंदुस्तान के साथ एंटी सबमरीन वारफेयर के तहत दुश्मन की पंडुब्बी को ढ़ूढ़ने का अभ्यास करना चाहता है।

अमेरिका के सोनार सिस्टम और हिंदुस्तान के सोनार सिस्टम अलग-अलग तरह के हैं। अमेरिका के पास एंटी सबमरीन वार फेयर के अनुभव का भंड़ार है। हिंदुस्तान इसका इस्तेमाल करना चाहता है। चीन की पंडुब्बियों पर नजर रखने के लिए भारत के पास पी-8 आई जैसे मेरीटाईम रिकन्सैंस सर्विलैंस एअरक्रॉफ्ट्स हैं।

आखिर एंटी सबमरीन वारफेयर कैसे काम करती है ये अहम सवाल है। सोनार टैक्नोलॉजी साउंड़ रेंजिंग कहलाती है। कोई भी जहाज या पंडुब्बी जब चलती है तो उसकी आवाज प्रोपेलर या जनरेटर से आती है उसे पैसिव ऐरे कहा जाता है। पनडुब्बी से टकराकर अपनी भेजी आवाज से मालूम चल जाता है कि किस एंगल से कहां से आवाज आ रही है। इस आवाज को फिंगर प्रिंटिग की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यानि भविष्य में वो पंडुब्बी उस इलाके में आई तो खुद व खुद उसकी सारी जानकारी मिल सकेगी।

भारत,अमेरिका और जापान मिलजर जून के तीसरे और चौथे हफ्ते में जापान के ओकिनावा सी में मालाबार एक्सरसाइज करेंगे। इस वॉर एक्सरसाइज में भारत की दो स्टील्थ फ्रिगेट, एक टैंकर और एक किरच क्लास बोट हिस्सा लेंगे। तो अमेरिकी पनडुब्बी भी रहेगी। इस एक्सरसाइज के दौरान एंटी सबमरीन वारफेयर एक्सरसाइज की जायेगी। हिंदुस्तान साउथ चाईना सी में फ्रीड़म ऑफ नेवीगेशन का पक्षधर है, लेकिन अमेरिका या चीन के साथ विवाद रखने वाले दूसरे देशों के साथ सामरिक साझेदार नहीं है। अगर चीन से हिंदुस्तान को ये भरोसा मिल जाये कि साउथ चाइना सी में हिंदुस्तान के आर्थिक हितों को चीन नुकसान नहीं पहुंचायेगा तो हिंदुस्तान के साथ चीन के लिए भी हिंदमहासागर में शांति मिल सकती है, नहीं तो हिंदमहासागर में लग जायेगा पंडुब्बियों का पनघट।


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