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सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए ट्रंप ने भारत के सामने रखी ये बड़ी शर्त

नई दिल्ली (18 अक्टूबर): लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए प्रयासरत भारत के सामने अमेरिका ने शर्त रखी है। कई बार भारत को सदस्य बनाए जाने का समर्थन करने वाले अमेरिका ने कहा कि भारत को इसके लिए वीटो पावर की रट छोड़नी होगी। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निकी हैली ने कहा कि यदि भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता चाहता है तो उसे वीटो पर अपनी रट छोड़नी होगी। यानी भारत को स्थायी सदस्यता मिलेगी भी तो उसके पास किसी प्रस्ताव पर वीटो करने का अधिकार नहीं होगा।

निकी हेली ने कहा कि रूस और चीन दो ऐसी वैश्विक शक्तियां हैं, जो सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में बदलावों के खिलाफ हैं। हेली ने अमेरिका भारत मैत्री परिषद द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा, (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह सुधार) वीटो से कहीं अधिक बड़ी चीज है। सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है। रूस, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के पास यह शक्ति है और इनमें से कोई इसे छोड़ना नहीं चाहता और न ही इस ताकत को दूसरे देश से साझा करना चाहते। इसलिए सुरक्षा परिषद में भारत को शामिल करने की मुख्य बात यह है कि वह वीटो का राग अलापना बंद करे। 

अमेरिका भारत मैत्री परिषद के अध्यक्ष स्वदेश चटर्जी द्वारा किए गए एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए राजी है और हमेशा से वह इस पर जवाब देता आया है। हेली ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस या सीनेट की सुरक्षा परिषद सुधारों में कोई बहुत अधिक भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, सही बात कहूं तो नहीं है। वे सही मायने में कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि सुरक्षा परिषद को लेकर सुरक्षा परिषद के सदस्य कांग्रेस की बात नहीं सुनेंगे। 


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