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13 साल में सबसे नीचे भारतीय डेमोक्रसी, 10 पायदान नीचे गिरा भारत

एक साल पहले भारत की सबसे कमजोर डेमोक्रसी रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वार्षिक लोकतंत्र सूचकांक ने एक स्नैपशॉट तैयार किया गया है। जिसमें 165 स्वतंत्र राज्य और दो प्रदेशों की डेमोक्रेसी के बारे में खुलासे किए गए है। साल 2019 में भारत की डेमोक्रेसी का प्रदर्शन ठीक रहा है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जनवरी):  एक साल पहले भारत की सबसे कमजोर डेमोक्रसी रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वार्षिक लोकतंत्र सूचकांक  ने एक स्नैपशॉट तैयार किया गया है। जिसमें 165 स्वतंत्र राज्य और दो प्रदेशों की डेमोक्रेसी के बारे में खुलासे किए गए है। साल 2019 में भारत की डेमोक्रेसी का प्रदर्शन  ठीक रहा है।

अप्रेल-मई 2019 में चुनाव ने डेमोक्रेसी की बड़ी भूमिका अदा की है। सूचकांक की वैश्विक रैंकिंग में देश 10 वे नंबर से गिर गया है। देश का स्कोर साल 2018 में 7.23 रहा वहीं साल 2019 में 6.9 रहा है। 

साल 2019 का देश का स्कोर सबसे कम रहा है। साल 2006 के बाद से अब तक का स्कोर काफी कम रहा है। लोकतंत्र सूचकांक रैंक में देश को पांच पैरामीटर में रखा जा रहा है। चुनाव की प्रक्रिया, बहुलवाद , सरकार के कामकाज, राजनीति, राजनीतिक भागीदारी, राजनीतिक संस्कृति, नागरिक स्वतंत्रताएं जैसे पैरामीटर शामिल है।

पिछले साल अधिकतर राजनीतिक उथल - पुथल का असर देखा गया था। भारतीय जनता पार्टी ने कई इतिहासिक फैसले लिए जिसका भारी असर देखने के लिए मिला था।  इनमें से अनुच्छे 370 और जम्मू कश्मीर  के हालात, सीएए ने भी कई तरह का प्रभाव देखने के लिए मिला। साल 2019 में इन मुद्दों पर कई तरह के स्टैंड देखें गए लोगों ने अपनी अलग अलग राए रखी। 

वहीं इसी मामले पर कॉग्रेस लीडर कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह "भारतीय लोकतंत्र पर एक दबाव" थे।  


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