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डेंगू के इलाज का अस्पताल ने थमाया 18 लाख का बिल, नड्डा सख्त-मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली(21 नवंबर): डेंगू से पीड़ित एक बच्ची के इलाज पर 18 लाख का बिल देने वाले गुरूग्राम के एक फोर्टिस अस्पताल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सख्त रुख अपना लिया है। जेपी नड्डा कार्रवाई के लिए आगे आए और उन्होंने बच्ची के परिजनों से सारी जरूरी डिटेल्स और रिपोर्ट मेल करने को कहा है। 

- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ट्वीट कर कहा है कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और सरकार ने इस घटना को संज्ञान लेते हुए निजी अस्पताल से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। दूसरी तरफ अस्पताल के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी सारी जानकारी देने को कहा गया। 

क्या है पूरा मामला...

- डेंगू के इलाज का 18 लाख रुपये का बिल बावजूद इसके एक बच्ची की जान बच नहीं सकी। गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल अपने बिल को लेकर सवालों में घिर गया है। बच्ची के परिवार ने इलाज और बिल को लेकर सवाल खड़े करते हुए इसकी जांच की मांग की है। हालांकि अस्पताल ने अपनी सफाई में आरोपों से इनकार किया है। 

- 7 साल की बच्ची आद्या को 31 अगस्त को डेंगू के इलाज के लिए गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची की जान तो नहीं ही बची लेकिन अस्पताल ने इलाज के नाम पर भारी भरकम बिल बना दिया। 

- बताया गया है कि अस्पताल की तरफ से 18 लाख की डिमांड की गई। अस्पताल के बिल में एडमिशन चार्ज से लेकर इलाज और रूम रेंट तक का बिल 15 लाख 79 हजार 322 रुपये साफ-साफ दर्ज है।

- बच्ची के इलाज में लापरवाही बरतने के साथ ही ये आरोप भी लगाए गए हैं कि बिल के भुगतान के बिना अस्पताल शव देने के लिए तैयार नहीं हुआ। ये आरोप भी है कि बच्ची के पैरेंट्स को रोजाना ब्रेकअप भी मुहैया नहीं कराया जा रहा था। पैरेंट्स के बार-बार कहे जाने के बाद भी अस्पताल ने बच्ची का सीटी स्कैन और एमआरआई नहीं कराया। 

- उधर फोर्टिस अस्पताल की तरफ से दी गई लिखित सफाई में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया गया है। अस्पताल की तरफ से कहा गया है कि 7 साल की बच्ची आध्या को एक दूसरे प्राइवेट अस्पताल से 31 अगस्त की सुबह लाया गया था। उसको डेंगू था जो शॉक सिंड्रोम स्टेज की थी। हमने इलाज शुरू किया, लेकिन उसके ब्लड प्लेटलेट्स लगातार गिर रहे थे। हालत खराब होने पर हमने 48 घंटों के अंदर वेंटिलेटर पर रखा। 

- अस्पताल ने ब्रेकअप मुहैया नहीं कराए जाने के आरोपों को भी खारिज किया है। अस्पताल की ओर से कहा गया है कि परिवार को बच्ची की नाजुक हालत के बारे में बताया गया था। परिवार से बच्ची के बारे में रोजाना बात की गई। 14 सितंबर को डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर परिवारवाले बच्ची को अस्पताल से ले गए और उसी दिन उसकी मौत हो गई। बच्ची के इलाज में हमने सभी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस का ध्यान रखा। 20 पन्नों के बिल के बारे में परिवार को पूरी जानकारी दी गई, जब वो हॉस्पिटल छोड़कर गए। 

- अस्पताल की तरफ से भले ही किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया जा रहा हो लेकिन बच्ची के इलाज को लेकर बनाए गए भारी-भरकम बिल को लेकर उस पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।


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