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होली खेलने से पहले इसे ज़रूर पढ़ें...ज़रा सी चूक दे सकती है बड़ी परेशानी

हमारे देश में प्राचीन काल से होली टेसू और गेंदे के फूलों जैसे प्राकृतिक तरीकों से खेलने की परंपरा रही है। लेकिन औद्योगिकरण की मार से इस त्योहार के रंग भी अछूता नहीं रहे

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 मार्च): हमारे देश में प्राचीन काल से होली टेसू और गेंदे के फूलों जैसे प्राकृतिक तरीकों से खेलने की परंपरा रही है। लेकिन औद्योगिकरण की मार से इस त्योहार के रंग भी अछूता नहीं रहे। अब डाई या पक्के रंगों का भी जमकर इस्तेमाल किया जाता है। सुरक्षित होली खेलने के लिए ज़रूरी है कि ऑर्गेनिक या प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाए। यहां ये बताना ज़रूरी है कि होली पर छोटी सी चूक भी आगे चलकर बढ़ी परेशानी का सबब बन सकती है।

अगर शरीर पर कोई छोटा सा कट या खरोच भी है तो उसे वाटरप्रूफ बैंड-एड से ढक लें। क्योंकि रंगों में मौजूद रसायन थोड़ी मात्रा में भी इन कट के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर जाए तो आगे चलकर गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। कैंसर, अंधापन, त्वचा के जटिल रोगों का भी सामना करना पड़ सकता है। रंगों में मौजूद टॉक्सिन स्किन एलर्जी, एग्ज़ीमा जैसे रोगों की भी वजह बन सकते हैं।    

1. अगर आप बिना किसी सुरक्षा के सूखी त्वचा के साथ ही होली खेलते हैं तो बहुत संभव है कि होली के रंगों में मौजूद रसायन त्वचा को भेद कर नुकसान पहुंचाए। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि होली खेलने से जाने से एक घंटा पहले शरीर पर नारियल, जैतून या विटामिन ई तेल का लेप करें। बालों के लिए आप सरसो के तेल का इस्तेमाल करें। अगर आपके बाल लंबे हैं तो उन्हें बांध कर ही होली खेलें।   

2. उंगलियों के नाखूनों को होली के रंगों से बचाने के लिए अच्छा है कि आप पहले ही कोई गाढ़े कलर वाला नेल पेंट इस्तेमाल कर लें।

3. होली खेलते वक्त धूप के चश्मे का इस्तेमाल करे। इससे आप अपनी आंखों को रंगों के असर से बचा सकेंगे। अगर रंग आपकी आंखों में चले जाएं तो उन्हें साफ़ और ठंडे पानी से धोएं।

4. होली खेलने से पहले आपको प्राकृतिक रंग और डाई में फ़र्क भी समझ लेना चाहिए। प्राकृतिक रंग टेसू, गेंदा के फूल, चुकंदर के रस से बनाए जाते हैं। ऐसे ही रंगों से होली खेलने पर ज़ोर दें। वहीं कोई पक्का रंग या ग्रीस लगाने की कोशिश करे तो मना कर दें।

5. होली खेलते वक्त गीले कपड़ों में दो घंटे से अधिक ना रहे। जहां तक संभव हो सके सूखी होली ही खेलें। लेकिन उसमें भी चेहरे और हाथों को बीच बीच में धोते रहे। साथ ही दही का कटोरा भी पास में ही रखें। दही के इस्तेमाल से रंगों को छुटाने में आसानी रहती है। साथ ही ये आपकी त्वचा को माश्चराइज़ करने के साथ नम बनाए रखता है।  

6. तेल लगाने के बाद जेल आधारित सनस्क्रीन का लेप करना ना भूलें। अगर आप तीन घंटे से अधिक तक धूप में रहते हैं तो इस प्रक्रिया को दोहराएं।

7. अगर होली खेलते वक्त आपको चोट लगती है और कहीं कट लगने से खून निकलता है तो शरीर के उस हिस्से पर टैप वाटर के नीचे रखें या बर्फ रखें। इस हिस्से को डेटॉल या सेवलॉन से साफ़ करें। इसके बाद होली खेलने से बचें। ऐसी स्थिति में पिछले 4 या 5 महीने से टेटनस का इंजेक्शन नहीं लगवाया तो उसे लगवाएं।   

8. होली खेलते वक्त थोड़ी थोड़ी देर में पानी पीते रहें। ये आपकी त्वचा को सूखने से बचाएगा।

9. होली खेलने के बाद शॉवर या टैप के पानी के नीचे 5-10 मिनट तक खड़े हो जिससे कि रंग की अधिक मात्रा निकल जाए। सिर्फ हल्के लिक्विड सोप का इस्तेमाल करें। अधिक ज़ोर लगाकर त्वचा को साफ़ करने की कोशिश ना करें।

10. गाढ़े रंग को छुड़ाने के लिए देसी तरीके जैसे कि नींबू के रस, दही, चंदन मिश्रण का इस्तेमाल करें। आप हल्दी और आटे का पेस्ट बनाकर उसे 15-20 मिनट तक शरीर पर लगाए रखें। फिर इसे बिना उबले दूध से साफ़ करें।

11. चेहरे को साफ़ करने के लिए रूई पर जैतून का तेल लगाकर इस्तेमाल करें। लेकिन इससे पहले चेहरे को पानी से धो लें।  

12. होली के तीन दिन बाद तक स्टीम या सॉना नहीं ले। ऐसा करने से भाप से त्वचा के छिद्रों के खुलने से रंगों के अंदर दाखिल होने का खतरा रहता है। ऐसी गतिविधि से भी बचें जिसमें कि पसीना आता हो।  


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