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चैत्र नवरात्र से शुरु हुआ नव संवतसर, मंदिरों में गूंजे घंटे घड़ियाल, घरों में घट स्थापना

नई दिल्ली (28 मार्च): आज चैत्र नवरात्रि और सनातन संस्सकृति का नव वर्ष है।  नवरात्रि के पहले दिन की जाती है मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है  और कलश स्थापना भी की जा रही है। देवी भागवत के अनुसार मां भगवती दुर्गा का कृपा पाने के लिए विधि विधान से नौ दिन तक दुर्गा देवी पूजन-अर्चना करनी चाहिए। इससे मनोवांछित फल तो मिलता ही है साथ ही मां का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। कलश स्थापना सुबह साढ़ें आठ बजे के बाद कर सकते हैं। या फिर अभिजीत मुहूर्त्त मध्यान्ह 11:35 बजे से 12:23 के बीच  भी कलश स्थापना हो सकती है। 

इस प्रकार प्रतिपदा 28 मार्च को दिन में 8 बजकर 26 मिनट पर शुरु होगी। कलश स्थापना के लिए सबसे पहले स्नानादि कर पूजा स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद सबसे पहले लकड़ी के एक आसन पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणेश को याद करते हुए इस पर चावल रखें। ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक वस्त्र पर श्री गणेश जी का स्मरण करते हुए थोड़े चावल रखें। अब मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर जौ बोयें, फिर इस पर जल से भरा मिट्टी, सोने या तांबे का कलश विधिवत स्थापित करें।


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