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'पाकिस्तान का संविधान एक हिंदू ने किया था तैयार'

नई दिल्ली (17 जून) : क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान का संविधान एक हिंदू ने लिखा था। इनका नाम था जोगेंद्र नाथ मंडल। पाकिस्तान के गठन के बाद मंडल ना सिर्फ वहां के पहले क़ानून मंत्री बल्कि पाकिस्तान का संविधान लिखने वाली कमेटी के अध्यक्ष भी थे। ये बात अलग है कि मंडल 1950 में भारत में कोलकाता वापस आ गए और मुड़ कर फिर कभी पाकिस्तान नहीं गए।

मंडल का नाम आरएसएस से जुड़े थिंकटैंक इंडियन पॉलिसी फाउंडेशन (आईपीएफ) की नई पत्रिका 'पाकिस्तान वॉच' के पहले अंक की वजह से सुर्खियों में आ रहा है। इस पत्रिका में पाकिस्तान के पहले क़ानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल का इस्तीफ़ा छापा गया है। आईपीएफ के निदेशक राकेश सिन्हा के मुताबिक पत्रिका के हर अंक में पाकिस्तान के निर्माण और विभाजन से जुड़ा एक दस्तावेज़ ज़रूर छापा जाएगा।  

इनाडु इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मंडल के इस्तीफे का प्रकाशन होने से बुद्धिजीवी वर्ग और आधुनिक इतिहासकारों के बीच बहस छिड़ गई है। माना जाता है कि पाकिस्तान में विभाजन के बाद जाने वाले हिन्दू दलित समाज को लेकर भी आजतक कोई ठोस रिसर्च या अध्ययन सामने नहीं आया है। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। ऐसे में आईपीएफ के ‘पाकिस्तान वॉच’ पत्रिका ने यूपी में बन रहे संभावित दलित-मुस्लिम गठजोड़ के सिद्धांत पर प्रश्न चिह्न लगा दिये हैं। संघ विचारक और आईपीएफ के निदेशक राकेश सिन्हा के मुताबिक, देश विभाजन के वक्त पाकिस्तान में दलित-मुस्लिम गठबंधन का जो प्रयोग किया गया था, वह इतिहास में पहला और आखिरी था। मंडल ने उस वक्त इसमें अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन, फिर उन्होंने ही कहा कि पाकिस्तान में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। यूपी में जो संकेत मिल रहे हैं, उसे देखते हुए लग रहा है कि बीएसपी और कांग्रेस इस कोशिश में हैं कि दलित-मुस्लिम की सोशल इंजीनियरिंग के सहारे सत्ता हासिल की जाये। जिन्ना के विश्वासपात्र थे जोगेंद्र नाथ मंडल

स्वाधीनता से पहले मंडल डॉ. अंबेडकर की तरह दलित आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे। बंगाल की सियासत में पहली बार मंडल ने दलित-मुस्लिम गठबंधन का प्रयोग किया था। अंबेडकर से उलट उनका इस नए गठबंधन पर अटूट विश्वास था। 1937 में पहली बार बंगाल असेंबली में मंडल को ख्वाजा निजामुद्दीन की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उसके बाद वे 1946 में एचएस सुहरावर्दी की सरकार में भी मंत्री रहे।  मंडल के कद का पता इसी बात से चल जाता है कि जिन्ना ने 1946 में अविभाजित भारत की अंतरिम सरकार में मुस्लिम लीग की तरफ से जिन पांच नामों को भेजा था, उनमें एक नाम मंडल का भी था। यही नहीं, भारत की संविधान सभा के चुनाव में अंबेडकर जब बंबई में हार गए थे, तो ये मंडल ही थे जिन्होंने अंबेडकर को बंगाल असेंबली के जरिये चुनकर संविधान सभा में भेजा था। विभाजन के बाद मंडल न सिर्फ पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री बने, बल्कि पाकिस्तान के संविधान लिखने वाली कमेटी के अध्यक्ष भी रहे थे। लेकिन, 1950 में मंडल ने पाकिस्तान सरकार से इस्तीफा दिया और वापस कलकत्ता आ गए और फिर लौट कर कभी पाकिस्तान नहीं गये।

 


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