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आग उगलते सूरज से सरहद पर ऐसे अपना बचाव करते हैं हमारे प्रहरी

रेगिस्तानी इलाकों में भारत मां की सरक्षा में तैनात हमारे बीएसएफ के जवान और अधिकारियों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। थार का रेगिस्तान अंगारों के समान दहक रहा है। पाकिस्तानी बॉर्डर के पास इन दिनों पारा 50 डिग्री से ऊपर चल रहा है

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (8 जून): दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। गर्मी से अबतक अलग-अलग राज्यों में कई लोगों की मौतें हो चुकी है। गर्मी से कई जगहों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। कई जगहों पर आग उगलते सूरज ने पिछले 75 साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, यूपी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पिछले कई दिनों लू का कहर बदस्तूर जारी है।

देश के कई हिस्सों में तापमान का पारा 55 डिग्री के पास पहुंच गया है। गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। ऐसे में रेगिस्तानी इलाकों में भारत मां की सरक्षा में तैनात हमारे बीएसएफ के जवान और अधिकारियों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। थार का रेगिस्तान अंगारों के समान दहक रहा है। पाकिस्तानी बॉर्डर के पास इन दिनों पारा 50 डिग्री से ऊपर चल रहा है। तापमान इतना बढ़ गया कि जैसलमेर में दोपहर में बिना आग जलाए तपती रेत पर ही बीएसएफ के जवान पापड़ आसानी से सेंक रहे है। इसके अलावा जवान चावल भिगोकर बर्तन में रेत में रख देते हैं और तेज धूप में थोड़ी देर में वे पक जाते हैं। पाक से सटी मुरार सीमा चौकी पर अत्यधिक तापमान होने पर जवानों को रेतीले धोरों पर लू झुलसा रही है। 

बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से तापमान 48 से 49 डिग्री तक पहुंच रहा है। एक-दो बार तो 49 डिग्री भी पार कर गया है। सूरज की तपन से रेत के टीले इतने गर्म हो जाते हैं कि उन पर आसानी से पापड़ सेंका जा सकता है। पिछले साल मुरार सीमा चौकी पर जवानों ने लगातार दो दिन तक रेती पर पापड़ सेंके थे। गौरतलब है कि रेगिस्तान में 24 से 30 किमी. प्रतिघंटा की गति से चलती गर्म हवा व आसमान छूता तापमान शरीर की क्रियाएं धीमी कर देता है। ऐसे में नाक से खून आना, चक्कर आना व उल्टी-दस्त आम बात है।

गर्मी चाहे कितनी भी हो सहहद पर गश्त हमेशा जारी रहती है। गर्मी से बचाने के लिए जवान अपनी जैकेट में नींबू पानी, प्याज आदि रखते हैं। इनकी दो-दो घंटों में इनकी ड्यूटी बदली जाती है। गश्त के लिए ऊंट के बजाय डेजर्ट स्कूटर का उपयोग अधिक किया जाता है, जिससे जवानों के साथ ऊंटों को कुछ राहत मिल सके। वॉच टॉवर पर झोंपे (झोपड़ी) बनाए गए हैं। इनमें गर्मी कम लगती है। बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार वॉच टॉवर लोहे की चद्दर के बने हुए होने से जल्द गर्म हो जाते हैं। ऐसे में इन पर देशी तकनीक से झोंपे बनाए गए हैं। इन पर लगातार पानी का छिड़काव किया जाता है। इनके अंदर मिट्टी के मटकों में पानी रखा जाता है। अधिकांश चौकियों पर कूल रूम भी बनाए गए है, जिनमें बड़े-बड़े कूलर लगाए गए हैं।


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