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आमजन के दिल को छूने वाला कवि थे हरिवंश राय बच्चन

नई दिल्ली ( 27 नवंबर ): मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन मेरा परिचय, इन पंक्तियों के लेखक हरिवंश राय की आज जयंती है। उनका जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद के नज़दीक प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव पट्टी में हुआ। घर में प्यार से उन्हें ‘बच्चन’ कह कर पुकारा जाता था। आगे चल कर यही उपनाम विश्व भर में प्रसिद्ध हुआ। कई लोग भले ही यह कह सकते हैं कि वो सुपरस्टार अमिताभ के पिता होने की वजह से लोकप्रिय हैं। लेकिन यह हिंदी कविता और साहित्य से बिल्कुल अपरिचित लोगों के लिए ही कहा जा सकता है।

हरिवंश राय के पिता लाला प्रताप नारायण श्रीवास्तव और मां सुरसती देवी प्रतापगढ़ जिले के बाबू पट्टी गांव के रहने वाले थे। हरिवंश राय बच्चन को सबसे अधिक लोकप्रियता ‘मधुशाला’ की वजह से मिली। यह बच्चन की दूसरी रचना थी और 1935 में लिखी गई थी। इसके बाद 1936 में ‘मधुबाला’ और 1937 में ‘मधुकलश’ प्रकाशित हुई। इन तीनों रचनाओं ने हिंदी साहित्य में हालावाद की नींव डाली। जिसकी तर्ज पर कई और कवियों ने भी कविताएं लिखीं। यह वह दौर था जब प्रगतिवाद की नींव पड़ रही थी और छायावाद अपने अंतिम दौर में था। रहस्यवाद, क्षणवाद और व्यक्तिवाद से हिंदी कविता को मुक्त करने की बात कही जा रही थी। यहां तक कि छायावादी कवियों ने भी ‘युगांत’ की घोषणा कर दी थी।

अंग्रेजी सहित कई भारतीय भाषाओं में इस काव्य का अनुवाद हुआ। इसके अतिरिक्त मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, खादि के फूल, सूत की माला, मिलन यामिनी, बुद्ध और नाच घर, चार खेमे चौंसठ खूंटे, दो चट्टानें जैसी काव्य की रचना बच्चन ने की है।


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