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कार्तिक पूर्णिमाः हरिद्वार से लेकर काशी तक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

नई दिल्ली(4 नवंलबर): कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर देश की नदियों में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीहरि ने मत्स्यावतार के रूप में प्रकट हुए थे। भगवान विष्णु के इस अवतार की तिथि होने की वजह से आज किए गए दान, जप का पुण्य दस यज्ञों से प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर माना जाता है।

- हरिद्वार में मां गंगा के घाट पर जहां ब्रह्मूहर्त में ही श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। वहीं बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी में भी गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा-भक्ति से स्नान किया। 

- पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में दीपदान करने की भी परंपरा हैं। देश की सभी प्रमुख नदियों में श्रद्धालु दीपदान करते हैं। 

- कार्तिक पूर्णिमा पर अगर कृतिका नक्षत्र आ रहा हो तो यह महाकार्तिकी होती है। भरणी नक्षत्र होने पर यह विशेष शुभ फल देती है। रोहिणी नक्षत्र हो तो इस दिन किए गए दान-पुण्य से सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति है। 

- हरिद्वार काशी के अलावा संगम नगरी इलाहाबाद, हापुड़ में गढ़मुक्तेश्वर में सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मां गंगा में डुबकी लगाकर अपने को पावन कर लिया।

-  गंगा स्नान का कार्तिक माह में महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान शंकर व भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाना शुभ माना जाता है। 

- कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान दान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान कर लोग पूजा करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान का वैज्ञानिक महत्व है। इस दिन चंद्रमा की रोशनी का सबसे अधिक आकर्षण पानी में होता है। शरीर का अधिकतम भाग में पानी होता है। जब गंगा में स्नान करते हैं, तो चंद्रमा के किरणों का प्रवेश शरीर के समस्त अंगों में पड़ता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस दौरान जल में खड़े होकर स्नान करने से वैज्ञानिक दृष्टि से शरीर के लिए लाभदायक है। 


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