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पोखरण परमाणु परीक्षण जैसा है नोटबंदी का फैसला- गुरुमूर्ति

नई दिल्ली (13 दिसंबर): नोटबंदी के 35वें दिन भी आम लोगों के पास कैश की किल्लत है। लोग बैंक और एटीएम से पैसा निकालने के लिए परेशान हैं। आलम ये है कि बैंक और एटीएम के बाहर लगी लंबी-लंबी लाइनों से लोग डरने लगे हैं। पिछले एक महीने से ज्यादा समय से लोग अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इन सबके बावजूद भारी तादद में लोग पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले का समर्थन कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी नोटबंदी के पीएम मोदी के फैसले का स्वागत किया है। संघ के विचारक और अर्थशास्त्री गुरुमूर्ति ने नोटबंदी की तुलना 1998 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण से तुलना कि है।

एस गुरूमूर्ति ने नोटबंदी के कदम को वित्तीय पोखरण जैसा करार दिया और कहा कि इससे अर्थव्यवस्था में ऐसे बदलाव की उम्मीद है जो एक उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से जमीन जायदाद की कीमतों में गिरावट की शुरुआत होगी और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। नोटबंदी को वित्तीय पोखरण बताते हुए गुरूमूर्ति ने कहा कि जब लोगों के पास ज्यादा पैसा होता है तो उनमें ऐसी वस्तुएं खरीदने की इच्छा जागती है जिनकी जरूरत नहीं होती।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी से बड़ा बदलाव आएगा। जिस तरह से पोखरण से सोच में बुनियादी बदलाव आया। कौन सोचता था कि अमेरिका, भारत के बारे में सोचेगा। अगर हमने परमाणु परीक्षण नहीं किया होता तो वे आपकी तरफ देखते ही नहीं। गुरूमूर्ति ने कहा कि जिस तरह से पोखरण के बाद भारत में बुनियादी बदलाव आया और लोगों की उसके प्रति सोच बदली उसी तरह वित्तीय पोखरण से भी बुनियादी बदलाव आएगा, लेकिन इसे समझने, गणना करने व लोगों को इसके बारे में समझाने के लिए बहुत अलग सोच समझा की जरूरत है।

गौरतलब है कि भारत ने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किए थे और देश उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास परमाणु हथियारों की क्षमता है।


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