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गुरु पुर्णिमा पर महाकाल के दरबार में भक्तों की भारी भीड़

गोविंद गुर्जर, उज्जैन (9 जुलाई): आषाढ़ महीने के पूर्णिमा का खास महत्व है। इसे गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। देश भर के मंदिरों में गुरु पुर्णिमा के मौके पर खास रौनक देखा जा रहा है। सुबह से ही देशभर के मंदिरों में लोग अपने-अपने अराध्य की पूजा अर्चना में जुटे हुए हैं। इस मौके पर उज्जैन के महाकाल के मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भीड़ लगी हुई है।

देशभर के 12 ज्योतिर्लिगों में 'महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग' का अपना एक अलग महत्व है। महाकाल मंदिर दक्षिण मुखी होने से भी इस मंदिर का अधिक महत्व है। महाकाल मंदिर विश्व का एक मात्र ऐसा शिव मंदिर है जहाँ दक्षिणमुखी शिवलिंग प्रतिष्ठापित है। यह स्वयंभू शिवलिंग है। जो बहुत जाग्रत है। इसी कारण केवल यहां तड़के 4 बजे भस्म आरती करने का विधान है। यह प्रचलित मान्यता थी कि श्मशानों की ताजी चिता की भस्म से भस्म आरती की जाती थी। वर्तमान में गाय के गोबर से बने कंडो की भस्म से भस्म आरती की जाती है। 

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भस्म आरती केवल पुरुष ही देखते है। जिन पुरुषो ने बिना सीला हुआ सोला पहना हो वही भस्म आरती से पहले भगवन शिव को को जल चढ़ाकर और छू कर दर्शन कर सकते है। कहा जाता है कि जो महाकाल का भक्त है उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। महाकाल के बारे में तो यह भी कहा जाता है कि यह पृथ्वी का एक मात्र मान्य शिवलिंग है।


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