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नोटबंदी से गुजरात के आदिवासी बेहाल, घर खर्च चलाने के भी पड़े लाले

वडोदरा (23 नवंबर): नोटबंदी और कैश कि किल्लत से आम आदमी का हालबेहाल है। नोटबंदी के 15वें दिन भी लोग बैंक, एटीएम और पोस्ट ऑफिस के बाहर लाइन में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। कैश की कमी के कारण लोगों को घंटों-घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। इस नोटबंदी का असर किसानों पर भी खासा आसर पड़ रहा है। किसान जहां रबी फसल की बुआई नहीं कर पा रहे हैं वहीं दूग्ध उत्पादन से जुड़े लोगों का भी खास्ता हाल है। 

जिला सहकारी बैंकों पर भारतीय रिजर्व बैंक की 500 और 1000 रपये के पुराने नोटों को बदलने की पाबंदी के चलते गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के आदिवासी दुग्ध उत्पादक और किसान बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ये आदिवासी बाजार से अपनी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं भी नहीं खरीद पा रहे हैं क्योंकि उन्हें उनकी ग्राम स्तरीय सहकारी दुग्ध संस्था से नकदी मिलना बंद हो गई है।

बड़ौदा डेयरी दुग्ध उत्पादक सहकारी सोसायटी के मुताबिक वो इस मामले को केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक के सामने उठा रहे हैं ताकि आदिवासियों को तत्काल उनका भुगतान किया जा सके। बड़ौदा दुग्ध डेयरी हर रोज छोट उदयपुर जिले में 450 ग्राम स्तरीय दुग्ध उत्पादक सहकारी सोसायटियों से ढाई लाख लीटर दूध का संग्रहण करती है। इसमें कुल 45,000 आदिवासी दुग्ध उत्पादक एवं किसान सदस्य हैं।

 

 


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