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यहां आज भी मौजूद है भगवान कृष्ण की बनायी हुई द्वारका !

मान्यता के मुताबिक भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ। उनका बचपन वृंदावन में गुजरा और महाभारत युद्ध के बाद वो मथुरा छोड़कर अपने भाई बलराम, अन्य परिजनों के साथ यादव वंश की रक्षा के लिए अरब सागर स्थित एक द्वीप पर चले गए

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 अगस्त): मान्यता के मुताबिक भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ। उनका बचपन वृंदावन में गुजरा और महाभारत युद्ध के बाद वो मथुरा छोड़कर अपने भाई बलराम, अन्य परिजनों के साथ यादव वंश की रक्षा के लिए अरब सागर स्थित एक द्वीप पर चले गए। वहां उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की मदद से द्वारकापुरी का निर्माण कराया और वहीं बस गए। मान्यता के मुताबिक यदुवंश की समाप्ति और भगवान श्रीकृष्ण की जीवनलीला पूर्ण होते ही द्वारका समुद्र में डूब गई। द्वारका हिंदू धर्म के चारों धामों में से एक है। यह गुजरात के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के द्वीप पर स्थित है। इस नगरी का धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। वर्तमान में स्थित द्वारका, गोमती द्वारका के नाम से जानी जाती है। यहां आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार के लिए आदि शंकराचार्य ने द्वारकापीठ की स्थापना की थी।Dwarka

आधुनिक खोजों में भी इस क्षेत्र में रेत एवं समुद्र के अंदर से प्राचीन द्वारका के अवशेष मिले हैं। द्वारका की स्थिति और बनावट समुद्र के बीच द्वीप पर बने किले के समान है। लंबे असरे से भारतीय पुरातत्व विभाग यहां समुद्र में द्वारका के अवशेष को ढूढ़ने की कोशिश में जुटे हैं। इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। आर्कियोलॉजी एंड ओशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट को 1988 में इसी समुद्री इलाके में एक पर्वत भी मिला।

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डॉ. एस. कथरोली की अगुआई में हुई रिसर्च में पुरातत्वविदों को नर्मदा नदी के मुख्य स्थल से तकरीबन 40 किमी दूर और तापी नदी के मुख्य स्थल के पास अरब सागर के उत्तर-पश्चिम में प्राचीन नगर के अवशेष मिले। तब 130 फीट गहराई में 5 मील लंबे और करीब 2 मील चौड़ाई वाला 10 हजार साल पुराना नगर मिला। मरीन आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट को तकरीबन 2 साल की खोज में कई ऐसे नमूने मिले जो काफी अहमियत रखते हैं।

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इस टीम में शामिल पुरातत्वविद मितुल त्रिवेदी का कहना है कि द्वारका एक राज्य था। तब खंभात और कच्छ का अखात क्षेत्र नहीं था। संपूर्ण जमीन थी। हाल ही में द्वारका से सूरत तक समुद्र किनारे पर एक दीवार भी देखने को मिली है। इसका मतलब द्वारका से सूरत तक कृष्ण का राज्य था। सूरत के पास पाई गई नगरी और द्वारका नगरी में समानता है।


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