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'बिल क्लिंटन ने बचा लिया नवाज़ शरीफ को वरना फांसी पर लटका देते जनरल मुशर्रफ'

नई दिल्ली (11 जून): क्या जनरल परवेज़ मु्शर्रफ पाकिस्तान की सत्ता हथियाने के बाद अपने पूर्ववर्ती जनरल जियाहुक के पद चिन्हो पर चल रह थे... क्या परवेज़ मुशर्रफ ने भी नवाज़ शरीफ को फांसी पर चढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली थी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शौक़त अजीज की बात पर भरोसा किया जाये तो यह सौ फीसदी सच है। शौकत अजीज ने कहा है कि अगर सन 2000 में बिल क्लिंटन इस्लामाबाद न आये होते तो परवेज़ मुशर्ऱफ ने नवाज़ शरीफ को फांसी चढा़ दिया होता।

शौक़त अजीज ने यह बात अपनी किताब 'फ्रॉम बैंकिग टू थोर्नी वर्ल्ड पॉलिटिक्स में लिखी है। उन्होंने लिखा है कि बिल क्लिंटन उस दौरे का केवल एक मकसद नवाज़ शरीफ की जान बचाना था। वो यहां आये और कहा कि नवाज़ शरीफ के साथ व्यक्तिगत रंजिश के तहत कोई कार्रवाई न की जाये। परवेज़ मुशर्रफ ने अक्टूबर 1999 में नवाज़ शरीफ की सरकार का तख्ता पलट कर खुद सत्ता हथिया ली थी।

उस समय नवाज़ शरीफ के खिलाफ तमाम ऐसे दर्ज़ करवाये गये थे जिनका नतीजा फांसी ही थी, लेकिन इस्लामाबाद से क्लिंटन के रवाना होने के कुछ दिन बाद ही अप्रैल 2000 में पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें फांसी देने के बजाये आजीवन कारावास की सजा सुनायी। इसके बाद सऊदी अरब ने हस्तक्षेप किया और तब कहीं जा कर नवाज़ शरीफ को पाकिस्तान वापस ने लौटने की शर्त पर जेल से बाहर आने की मोहलत मिली।

मुशर्रफ के अधीन प्रधान मंत्री रह चुके शौकत अजीज ने लिखा है कि मुशर्रफ और बेनजीर भुट्टो दोनों ही चाहते थे कि नवाज़ शरीफ 2008 के आम चुनावों से पहले पाकिस्तान वापस न लौटें। उस समय के अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी रिचर्ड बूचर का हवाला देते हुए अजीज ने यह तथ्य अपनी किताब 'फ्रॉम बैंकिग टू थोर्नी वर्ल्ड पॉलिटिक्स' में लिखे हैं। उस समय की परिस्थितियों के मद्देनजर अमेरिका भी चाहता था बेनजीर प्रधानमंत्री बनें और मुशर्रफ राष्ट्रपति बनें रहें।


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