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महाराष्ट्र को ऑपरेटिव बैंक घोटाला: NCP नेता अजित पवार समेत 70 के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश

महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में बांबे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एनसीपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित करीब 70 अन्य लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है

 इंद्रजीत सिंह, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 अगस्त): महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में बांबे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एनसीपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित करीब 70 अन्य लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में पहली नजर में उनके खिलाफ सबूत हैं इसलिए केस दर्ज कर मामले की जांच हो मामला 2007 से  2012 के बीच लगभग 2500 करोड़ रुपये डुबाने  का है ये  पैसे चीनी मिलों  को लोन , सरकारी योजनाओं के पैसे में बंदरबांट और लघु उद्योग के नाम पर दिए गए। नाबार्ड ने अपनी रिपोर्ट में लोन देने के तरीकों पर सवाल उठाया था।

विधानसभा सभा चुनाव से ठीक पहले एमएससीबी बैंक घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के कोर्ट के आदेश ने एनसीपी की मुश्किलें बढ़ा दी है क्योंकि बैंक के डायरेक्टर्स में शरद पवार के भतीजे अजित पवार , महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल सहित एनसीपी के कई नेताओं के नाम हैं हालांकि एनसीपी का कहना है कि पुलिस इस मामले में जांच कर क्लीन चिट दे चुकी है लेकिन चुनाव के समय जिस तरह ये मामला आया उसके टाइमिंग को लेकर सवाल है जहां तक बात एनसीपी नेताओं की है तो पार्टी साफ करना चाहती है कि वो हर तरह की जांच के लिए तैयार है और इस बैंक से सभी पार्टी के नेता जुड़े है।

याचिका में आरोप के मुताबिक इस मामले में महाराष्ट्र स्टेट को ऑपरेटिव  बैंक मेँ लोन बाटने और सरकारी आर्थिक मदद देने के नाम पर करोड़ों रुपये की बंदरबांट हुई है।  इस बैंक घोटाले में सूबे के बेहद ताकतवर सियासी लोगों ने सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया, बांबे हाईकोर्ट ने  सरकार को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए है। बैंक घोटाले की जांच से  एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के परिवार मुश्किल बढ़ सकती है। अजित पवार के अलावा इस मामले के में कांग्रेस और एनसीपी के कई ब ताकतवर कई  राजनेताओं ,सरकारी अधिकारीयो और राज्य के 34 जिलों के को ऑपरेटिव बैंक के कई अफसरोँ समेत कुल 70 से अधिक लोगों के नाम है NABARD द्वारा कराए गए निरीक्षण और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसायटीज  एक्ट के तहत अर्धन्यायिक जांच आयोग द्वारा दायर आरोपपत्र में एनसीपी नेता शरद पवार के भतीजे अजित पवार और बैंक के कई निदेशकों समेत अन्य आरोपियो पर उंगली उठाई  गई है। इसमें कहा गया था कि उनके फैसलों, कार्यो और लापरवाही की वजह से बैंक को 2500 करोड़ का  नुकसान उठाना पड़ा।

इस बैंक घोटाले में दर्जनों दिग्गज नेताओं , बैंक अफसरों समेत कुल 70 से अधिक लोगों के खिलाफ  बांबे हाई कोर्ट के एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने दिग्गज नेताओं पर कानूनी शिकँजा कसने का ऐलान कर दिया है। और कहा है कि कानून अपना काम करेगा। बांबे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को पूर्व  उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित कई दिग्गज नेताओं  के खिलाफ पांच दिन के भीतर एफआइआर दर्ज करने का आदेश  दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में पहली नजर में उनके खिलाफ विश्वसनीय सुबूत हैं। इस मामले में कोई भी हो आरटीआइ कार्यकर्ता सुरेंद्र अरोड़ा ने 2015 में पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई थी और हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआइआर दर्ज किए जाने की मांग की थी। गुरुवार को बांबे हाई कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट, शिकायत और एमसीएस एक्ट के तहत दायर आरोपपत्र से साफ है कि जिनके नाम हैं उनके खिलाफ इस मामले में विश्वसनीय सुबूत हैं। इस घोटाले में कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के साथ ही  बीजेपी और शिवसेना के कुछ नेताओं के भी नाम शामिल हैं।


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