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अगर देते हैं फर्जी रेंट रसीद तो अब फसेंगे

नई दिल्ली (5 अप्रैल): अगर आप इनकम टैक्स भरते समय फर्जी रेंट रसीद का सहारा लेते हैं तो आपका फंसना तय है। क्योंकि हालात अब बदल सकते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब टैक्सपेयर से इस बात का सबूत मांग सकता है कि वह संबंधित प्रॉपर्टी का वैध किराएदार है।

एंप्लॉयर से 'हाउस रेंट अलाउंस' पाने वाला सैलरीड एंप्लॉयी इस रकम के कम से कम 60% हिस्से पर टैक्स देने से बच सकता है, बशर्ते वह रेंट रसीद दे।

- असेसिंग ऑफिसर अब सैलरीड एंप्लॉयी की ओर से दिखाई गई टैक्सेबल इनकम का आंकड़ा मंजूर करते वक्त सबूत की मांग कर सकता है।

- वह लीज ऐंड लाइसेंस अग्रीमेंट, किराएदारी के बारे में हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसायटी को जानकारी देने वाले लेटर, इलेक्ट्रिसिटी बिल, वॉटर बिल जैसे सबूत मांग सकता है।

- माना जाता है कि फर्जी रेंट रसीदें देने वाले सैलरीड एंप्लॉयीज के पास इनमें से कोई भी जरूरी दस्तावेज नहीं होता है।

- हो सकता है कि वह व्यक्ति असल में रेंट चुका ही न रहा हो और अपने परिवार के घर में ही रह रहा हो और अपने पिता की दस्तखत वाली रसीदें दिखा रहा हो।

- कुछ मामलों में असल में किराएदार होने पर भी किराए की रकम बढ़ाकर दिखाई जाती है और इसमें तब तक दिक्कत नहीं आती है, जब तक कि किराया पाने वाला शख्स टैक्स चुकाने की लिमिट से बाहर हो।


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