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रेल हादसा: 'हादसे के बाद सुनाई दे रही थीं बस चीखें', हंसती-खेलती 3 साल की बच्ची हुई खामोश

नई दिल्ली(20 नवंबर): इंदौर-पटना रेल हादसे में कई परिवार बिखर गए। कई चश्मदीदों ने आंखों देखी बयां की। किसी का परिवार बिछड़ गया, किसी के अपने की जान हादसे में चली गई। एक शख्स ने मीडिया को बताया, "उज्जैन से 3 साल की बच्ची अपने परिवार के साथ बैठी थी, वो खूब हंस-खेल रही थी पर हादसे के बाद सुबह देखा तो उसका शरीर दो टुकड़ों में हो गया था। उसके मां-बाप का पता नहीं चल पाया है।" 

- एक शख्स ने बताया कि उसके भाई अरुण शर्मा फैमिली के साथ भोपाल से पटना शादी में जाने के लिए निकले थे।

- "पूरा परिवार हादसे का शिकार हो गया। S1 बोगी में अरुण, उनकी पत्नी नूपुर, बेटा दिव्यांश (11) और श्रेयांश (9) बैठे थे।'

- उनके मुताबिक उनके भाई अरुण की हालत क्रिटिकल है। भाभी नूपुर से फोन पर बात की तो पता चला कि वो बोगी में ही हैं।

- एक चश्मदीद के मुताबिक, "ट्रेन तेज स्पीड से चल रही थी, एकदम से पलट गई। S1 में बैठा हुआ था। डिब्बे के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे।"

- "जब संभले तो देखा कि सबकुछ बर्बाद हो गया था। हमारे 5 लोग लापता हैं, हम उन्हीं को ढूंढ रहे हैं।"

केवल चीख-पुकार सुनाई दे रही थी

- एक चश्मदीद ने कहा, "हादसे के वक्त गहरा अंधेरा था, कुछ नजर नहीं आ रहा था, केवल चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।"

- "हादसे के वक्त ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो, अचानक बर्थ पर सो रहे लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे।"

अफसरों ने नहीं दिया ध्यान

- एक दूसरे चश्मदीद ने कहा, "झांसी से जब ट्रेन चली तो एक बोगी के डिब्बे ज्यादा आवाज कर रहे थे। शिकायत की पर रेल अधिकारियों ने सुना नहीं। एक बोगी पुखरायां के पास बुरी तरह लड़खड़ा गई।"

- एक शख्स ने कहा, "बोगी के डिब्बे के आवाज करने की वजह से ट्रेन को दो बार रोका भी गया, लेकिन उसके बाद फिर ट्रेन को चला दिया गया।"

मलबे से निकलने की कोशिश कर रहे थे लोग

- एक शख्स ने कहा कि, " कुछ लोग मलबे से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन निकल नहीं पा रहे थे। तब तक कुछ गांव वाले भी आ गए थे, जिन्होंने मदद की।"

 


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