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विधानसभा चुनाव नतीजे : एग्जिट पोल कितने पास, कितने फेल

नई दिल्ली (19 मई) :  रिजल्ट से पहले जानिए रिजल्ट। एग्जिट पोल को लेकर कुछ ऐसे ही दावे किए जाते हैं। देश में संसद के चुनाव हों या राज्य विधानसभाओं के, मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल के नतीजे आने शुरू हो जाते हैं। कई बार ये एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो कई बार मुंह की खाते हैं। चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों पर भी कई एग्जिट पोल सामने आए। आइए देखते हैं कि इस बार किस एग्जिट पोल के अनुमान सटीक बैठे और कौन गलत साबित हुए।  

विधानसभा चुनाव खत्म होते ही आए एग्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक असम, तमिलनाडु और केरल में सत्ता परिवर्तन के रुझान दिख रहे थे। असम और केरल में तो ये अनुमान सही बैठे लेकिन जयललिता ने तमिलनाडु में फिर से जोरदार वापसी कर राज्य के लिए एग्जिट पोल को झुठला दिया। टीवी चैनलों के एग्जिट पोल के नतीजे असम में भारतीय जनता पार्टी, तमिलनाडु में डीएमके और केरल में एलडीएफ की जीत की ओर इशारा कर रहे थे लेकिन तमिलनाडु में वो गलत साबित हो गए। केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में एग्जिट पोल के अनुमान सही बैठे। यहां कांग्रेस और डीएमके गठजोड़ को जीता बताया जा रहा था, वोटों की गिनती में भी यही नतीजा निकला।

एग्जिट पोल के नतीजों में असम में पहली बार बीजेपी  की सरकार बनती दिख रही थी जो हकीकत साबित हुई और बीजेपी गठबंधन ने 90 सीटें हासिल की।  एग्जिट पोल के नतीजे पश्चिम बंगाल में भी सच के करीब साबित हुए। पोल ममता बनर्जी  को अपने दम पर आगे बढ़ता हुआ दिखा रहे थे। हालांकि यहां उनका यह दावा गलत हो गया कि तृणमूल कांग्रेस की सीटें कम होंगी। तृणमूल ने कांग्रेस सहित लेफ्ट और बीजेपी पर रुझानों में ही बढ़त बना ली थी और उसे आखिर तक बरकरार रखा। बता दें कि 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी को 184 सीटें हासिल हुई थी लेकिन इस बार उनकी पार्टी 210 से अधिक सीटों पर विजय हासिल करती दिख रही है। एग्जिट पोल के नतीजे तमिलनाडु में जयललिता की नेतृत्व वाली एआईडीएमके को हारा हुआ बता रहे थे लेकिन अम्मा हारी नहीं और उन्होंने 27 साल बाद राज्य में इतिहास रच दिया। तमिलनाडु में 27 साल बाद ऐसा हुआ है कि किसी दल ने सत्ता में लगातार वापसी की हो।

एग्जिट पोल के नतीजे केरल में वाम मोर्चा (एलडीएफ) को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ से बढ़त मिली हुई बता रहे थे जो सच साबित हुए और यहां एलडीएफ 90 से अधिक सीट हासिल कर बहुमत के पार चली गई। एग्जिट पोल्स के सबसे सटीक नतीजे असम के बार में सही साबित हुए और यहां जीत  के साथ ही बीजेपी शासित राज्यों की संख्या 9 हो गई है। बता दें कि असम में बीजेपी गठबंधन को इंडिया टुडे ने 79 से 93, एबीपी न्यूज ने 81, सी वोटर ने 57, चाणक्य ने 90, एबीपी ने 81 और इंडिया टीवी ने 53 से 61 सीटें दी थी। सर्वे में कांग्रेस को असम में 26 से 41 सीटें मिलती दिख रही थी। लेकिन कांग्रेस को इससे भी कम यानि 21 सीट ही हासिल हो सकीं। गौरतलब है कि असम में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। वहीं असम में मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ को सभी सर्वे में 6 से 18 सीटें दे रहे थे और पार्टी ने 13 सीटें हासिल की। पार्टी प्रमुख अजमल ने अपनी हार का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ा है।

बात पश्चिम बंगाल की करें तो यहां एबीपी ने ममता की तृणमूल कांग्रेस को 163, सी वोटर ने 167, इंडिया टीवी ने 243 और चाणक्य ने 173 सीटें दी थी और पार्टी ने कभी पोल्स के नतीजे को धता बताते हुए चुनाव में 210 से अधिक सीटें हासिल की। एग्जिट पोल्स  ने कांग्रेस- लेफ्ट गठबंधन को 45 से 126 सीटें मिलने की संभावना जताई थी जो सही साबित हुए और कांग्रेस सहित लेफ्ट को 75 सीटों पर संतोष करना पड़ रहा है। इसमें भी कांग्रेस ने लेफ्ट से अधिक अच्छा प्रदर्शन करते हुए उसकी तुलना में ज़्यादा सीटों पर जीत हासिल की। पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में कहा गया था कि भाजपा को यहां एक से तीन सीटें तक मिल सकती हैं। यहां भी बीजेपी को 7सीटें मिली। 

तमिलनाडु के मामले में टाइम्स नाउ-सी वोटर को छोड़कर सभी एग्जिट पोल के नतीजों में जयललिता के नेतृत्व वाली एआईडीएमके को हारा हुआ दिखाया जा रहा था लेकिन अम्मा ने 27 साल बाद इतिहास रचते हुए धमाकेदार वापसी की और 124 सीटें हासिल की। पोल्स के मुताबकि यहां डीएमके-कांग्रेस गठबंधन आसानी से बहुमत हासिल करता दिख रहा था लेकिन इस गठबंधन को 104 सीटें ही हासिल हुईं। इंडिया टुडे-माइ एक्सिस-इंडिया के एग्जिट पोल में डीएमके गठबंधन को 132 सीटें दी गई थी वहीं एआईडीएमके  को 95 सीटें दी गई थी। राज्य में बीजेपी के बार में पोल्स 3 सीट की बात कर रहे थे लेकिन पार्टी का खाता भी नहीं खुल पाया। न्यूज नेशन ने डीेएमके गठबंधन को 116 और एआईडीएमके को 97 सीटें दी थी और टाइम्स-नाउ सी वोटर ने एआईडीएमके को 139 और डीएमके गठबंधन को 78 सीटें थी।

केरल में माकपा की अगुवाई वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के जीत दिखाई जा रही थी जो सच साबित हुई और यहां एलडीएफ को 92 सीटें हासिल हुईं। पोल्स यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट पिछड़ता हुआ दिखा रहे थे और उसे 46 सीटें मिलीं। बता दें कि इंडिया टीवी के एग्जिट पोल में एलडीएफ को 94 सीटें मिल रही थी,जबकि  यूडीएफ को 43 वहीं भाजपा और अन्य को 3 सीटों पर जीतते हुए दिखाया गया था। बीजेपी को यहां एक ही सीट पर जीत मिली लेकिन इस राज्य में बीजेपी को इतिहास में पहली बार किसी विधानसभा सीट पर जीत मिली। इंडिया टुडे-एक्सिस के पोल में भी एलडीएफ को 94 तो यूडीएफ को 43 सीटें मिल दी गई और भाजपा को 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। सी वोटर के पोल में एलडीएफ को 78 और यूडीएफ को 58 सीटें दी थी और भाजपा के हिस्से कुल 2  सीट ही आ रही थी। पुडुचेरी में पोल्स कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन जीता हुआ बता रहे थे और  इंडिया टीवी -सी वोटर के पोल में द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को 10 से 18 सीटें मिलने की संभवना जताई गई थी लेकिन यहां द्रमुक सहित कांग्रेस को 17 ,जयललिता की एडीएमके को 4, अन्य को 1 और एएनआईआरसी को 8 सीटें हासिल होते हुई दिख रही हैं।

(नोट- खबर लिखे जाने तक रुझानों को इसमें शामिल किया गया है। अंतिम सारे परिणाम आने पर कुछ राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ घट सकती है)


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