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'हनुमान मंदिर' को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर छिड़ी मुहिम

जयप्रकाश त्रिपाठी, रायपुर (27 मई): छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों संकट मोचक कहे जाने वाले बजरंग बली खुद संकट में हैं। वह खुद सोशल मीडिया में अपने मंदिर को बचाने की गुहार लगाते देखे जा सकते हैं। हनुमान मंदिर को बचाने बाकायदा फेसबुक पर 'सेव हनुमान टेम्पल' नाम से एक पेज बनाया गया है। जिसे हजारों लोगों ने लाइक भी किया है। इसमें बजरंग बली खुद भक्तों से अपना मंदिर बचाने की गुहार लगा रहे हैं। आइये आपको समझाते हैं, आखिर ये पूरा माजरा क्या है।

दरअसल राजधानी रायपुर के महादेव घाट में साल 2010 में एक हनुमान मंदिर का निर्माण किया गया, जिसके सामने 19 दुकाने भी बनाई गयी। लेकिन मंदिर का निर्माण जिस जमीन पर किया गया वो सरकारी थी। मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट पर आरोप लगे कि ट्रस्ट ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर उस पर मंदिर का निर्माण किया है। लेकिन ये मामला तब और गरमा गया जब इस बात का खुलासा हुआ कि मंदिर बनाने वाली ट्रस्ट किसी और कि नहीं बल्कि खुद छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और उनके परिवार की है।

कांग्रेस ने जहाँ इस मामले में सरकार को जमकर घेरा वहीं एक सामाजिक संस्था, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पंहुच गयी। जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने की 10 तारीख को फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि मंदिर को तोड़कर मैदान से अवैध कब्जा हटाया जाए। वो भी 15 दिनों के अंदर।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 15 दिनों के अंदर हनुमान मंदिर तोड़े जाने के आदेश के बाद से ही इस मसले पर सियासत गरमा गयी है। मंदिर को बचाने जहाँ हिंदूवादी संगठन हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। वहीँ सोशल मीडिया पर भी हनुमान मंदिर को बचाने के लिए पेज बना दिए गए हैं। जिसमे दूसरों के संकट हरने वाले बजरंग बली को खुद संकट में दिखाया गया है और वो अपने मंदिर को बचाने की गुहार भक्तों से लगा रहे हैं।

इतना ही नहीं, हिंदूवादी संगठनों के नेता तो कोर्ट के आदेश को धता बताते हुये मंदिर तोड़ने आने वाले बुलडोजर के सामने लेट जाने की बात कर रहे हैं, वहीँ इन लोगों को मंदिर बचाने के लिए जेल जाने से भी गुरेज नहीं है।

कांग्रेस भी इस मुद्दे पर काफी संभल कर कदम रख रही है, मुद्दा आस्था से जुड़ा है और भारत जैसे देश में आज एक बड़े वोट बैंक का निर्धारण मंदिर- मस्जिद करते हैं। जिसके चलते कांग्रेस इस मुद्दे पर खुलकर मंदिर को तोड़े जाने की बात तो नहीं कर रही। लेकिन, कांग्रेस सीधे तौर पर विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल पर आरोप लगा रही है कि उन्होंने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मंदिर और दुकानों का निर्माण करवाया। कांग्रेस सरकार की मंशा पर भी सवाल उठा रही है।

वहीँ विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के समर्थक इस पुरे मसले को राजनैतिक साजिश का हिस्सा बताते हैं। उनकी माने तो मंदिर बनाने वाली समिति में एक सदस्य विधानसभा अध्यक्ष भी हैं जिनकी छवि बेदाग़ है। जिसके चलते इस मंदिर मुद्दे को हवा दी जा रही है।

दरअसल कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद मंदिर को तोड़े जाने का आदेश दिया है, और कोर्ट के इस आदेश के पीछे है राज्य के मुख्य सचिव द्वारा कोर्ट में जमा किया गया एक एफिडेविट। जिसमे उन्होंने तहसीलदार की जांच का जिक्र किया है। तहसीलदार ने ही अपनी जाँच में पाया की जिस जगह आज मंदिर है वहां मेला मैदान था। और इसी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर मंदिर को तोड़ने का आदेश सुना दिया है।

10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ये आदेश दिया था और आज कोर्ट द्वारा दी गयी समय सीमा खत्म हो रही है। जिसके आधार पर आज किसी भी हालत में रात 12 बजे से पहले मंदिर टूटना चाहिए, वरना कोर्ट इसे अपने आदेश की अवमानना मान सकता है।

हालांकि, मामला आस्था से जुड़ा जिसके चलते राज्य के गृहमंत्री से लेकर रायपुर के महापौर तक कोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए मंदिर को तोड़े ना जाने की हिमायत करते नजर आ रहे हैं। वहीँ भाजपा के प्रवक्ता और रायपुर विधायक श्रीचंद सुंदरानी तो यहाँ तक कह रहे हैं कि हम मंदिर तोड़ने वाले नहीं बल्कि बनाने वाले लोग हैं।


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