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नोटबंदी का एक साल: कितना ‘कैश लेस’ हुआ इंडिया?

नई दिल्ली (6 नवंबर): नोटबंदी को एक साल पूरे होने जा रहे हैं। 8 नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोटों पर पाबंदी के एक साल पूरे हो जाएगें। इस मौके पर जहां कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां ब्लैक डे मनाने जा रही है। वहीं सरकार इस दिन एंटी करप्शन डे के तौर पर मनाने का ऐलान किया है। इन सबके बीच सवाल उठता है कि नोटबंदी के एक साल बाद देश किताना कैश लेस हुआ है।

नोटबंदी के अपने फैसले को सही ठहराने के लिए सरकार दावा कर रही थी कि इससे देश ने ‘लेस-कैश’ इकोनॉमी की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है और इससे डिजिटल इंडिया की बुनियाद मजबूत हुई है। RBI की संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI)  देश में होने वाले सभी तरह के डिजिटल भुगतान की निगरानी रखने वाली सबसे बड़ी संस्था है। NPCI के आंकड़ो के मुताबिक नोटबंदी के बाद देश डिजिटल ट्रांजेक्शन को बहुत तेजी से अपना रहा है।

- साल  2017 -2018 में अक्टूबर तक ही डिजिटल ट्रांजेक्शन 1000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। बढ़ोतरी की रफ्तार का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले पूरे वित्त वर्ष यानि 2016 - 2017 में कुल मिलाकर इतना डिजिटल ट्रांजेक्शन  हुआ था। अनुमान है मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने तक डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ कर 1800 करोड रुपए हो जाएगा।

-बैंक से लेकर e Wallet तक, सब UPI को तेजी से अपना रहे हैं। अब तक NPCI के अपने ऐप BHIM के अलावा 57 बैंक इससे जुड चुके हैं।

- बीते महीने यानि अक्टूबर 2017 में ही UPI से होने वाले लेन देन का आंकडा 7 करोड 70 लाख पहुंच गया। इसके एक महीने पहले यानि सितंबर में सिर्फ 3 करोड 90 लाख लोगों ने UPI के जरिए लेन देन किया था। इस  साल UPI के जरिए अब तक 7057 करोड का लेन देन हो चुका है जो पिछले साल के मुकाबले 32 फीसदी ज्यादा है।

- पिछले एक साल में कार्ड से होने वाले लेन देन में 60 फीसदी का इजाफा हुआ है और प्वांइट ऑफ सेल मशीन की संख्या में 78 फीसदी का इजाफा हुआ है।

सरकार के तमाम दावों के पीछे ये सच्चाई भी छिपी हुई है कि भारत में लोग नगदी का मोह नहीं छोड पर रहे हैं। देश में इस समय  1,31,81,190 करोड नगदी  है जिससे लेन देन हो रहा है। डिजिटल लेन देन के सारे तरीकों को जो़ड़ कर भी देखा जाए तो ये कुल लेन देन के 5 फीसदी से भी कम है। यानी भारत में अभी भी 95 फीसदी काम काज कैश से ही चल रहा है।

- भारत में 70 करोड लोगों के पास डेबिट कार्ड है और 3 करोड़ लोगों के पास क्रेडिट कार्ड है लेकिन असल में इनका इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत कम है।


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