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अयोध्या मामला: रामलला विराजमान की दलील, जन्मस्थान देवता है और देवता बंट नहीं सकता

अयोध्या मामले में आज पांचवे दिन की सुनवाई में रामलला विराजमान के तरफ से दलील दी गयी कि राम जन्मभूमि स्वयं देवता है। यह एक न्यायिक व्यक्ति की श्रेणी में रखा जा सकता है।

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प्रभाकर मिश्रा, न्यूज़ 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(13 अगस्त): अयोध्या मामले में आज पांचवे दिन की सुनवाई में रामलला विराजमान की तरफ से दलील दी गयी कि राम जन्मभूमि स्वयं देवता है। यह एक न्यायिक व्यक्ति की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका कोई मालिक नहीं है इसलिए देवता पर संयुक्त कब्जा नहीं हो सकता। आज रामलला विराजमान की तरफ से दलील पेश कर रहे वरिष्ठ वकील के परासरन ने अपनी दलीलें पूरी कर ली। उसके बाद वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने रामलला विराजमान के लिए दलील पेश करना शुरू किया। वैद्यनाथन ने दलील दी कि भगवान राम का जन्म स्थान लोगों के विश्वास से एक देवता बन गया है। 

15वीं शताब्दी में आने वाली तीन गुंबद वाली बाबरी मस्जिद ने  भी हिंदुओं की आस्था की पवित्रता और गरिमा में विश्वास नहीं हिला पाया।  इसके अलावा हिंदुओं के विश्वास का अधिकार कभी नहीं छिना गया। सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि भगवान का विनाश या विभाजन या अलगाव नहीं हो सकता। एक देवता की संपत्ति का भी विभाजन नहीं किया जा सकता है। इसलिए अगर देवता की संपत्ति को विभाजित नहीं किया जा सकता है, तो देवता को भी विभाजित नहीं किया जा सकता है। 

वैद्यनाथन ने दलील दी कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मुगल काल के में हुआ था। हिन्दू उस दौरान ढांचा खड़ा नहीं कर सकता था, लेकिन अब उनके पास मौका है कि वो ढ़ाचा खड़ा करें और पूजा करें। वैद्यनाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इसपर सहमत था कि मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। जब मंदिर तोड़ा गया तो भी लोगों की आस्था जन्मभूमि पर कभी खत्म नहीं हुई बल्कि और मजबूत हुई। रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि विवादित भूमि से हिन्दुओं को पूरी तरह से बेदखल नहीं किया गया था, मुस्लिम कभी भी विशेष अधिकार में नहीं थे। यहां तक कि मुसलमानों ने भी इसे स्वीकार किया है।

इस बीच रामलला विराजमान के तरफ से वैद्यनाथन के दलील के तरीके पर राजीव धवन ने ऐतराज जाहिर किया। धवन ने कहा कि वैद्यनाथन सिर्फ इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पढ़ रहे हैं। इन दलीलों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर रहे हैं। इस पर मुख्यन्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ' हम ये साफ कर देने चाहते है कि हमें कोई जल्दी नहीं है। इस मामले में सभी पक्षों को अपनी दलील पेश करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। वैद्यनाथन जिस तरह से अपना पक्ष रख रहे हैं, उन्हें रखने दें।


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