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जानें कौन हैं आतंकियों से लोहा लेने वाला चेतन चीता ?

नई दिल्ली (5 अप्रैल): सीआरपीएफ के कमांडेंट चेतन चीता एम्स अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए। चेतन 14 फरवरी को कश्मीर के बांदीपुरा में एनकाउंटर में आतंकियों से लोहा लेते हुए बुरी तरह जख्मी हो गए थे। राजस्थान के कोटे में पैदा हुए चेतन चीता बचपन से ही निडर हैं।

उनकी मां सुभद्रा ने बताया कि शुरू से ही उनको वर्दी की नौकरी पसंद थी। इतना ही नहीं, 13 साल की उम्र उन्होंने स्कूटर और कार चलना सीख लिया था। कोटा में सेंटपॉल स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। चेतन के तीन दोस्त भी सीआरपीएफ में तैनात हैं। कश्मीर में उनकी दूसरी पोस्टिंग है। इससे पहले हैदराबाद, शिवपुरी और रांची में भी तैनात रहे।

पिता रामगोपाल चीता के अनुसार चेतन ने कॅरियर के रूप में प्रशासनिक सेवा के बजाय सुरक्षा बल की नौकरी अपनी मर्जी से चुनी। उनके पास प्रशासनिक सेवा में जाने का अवसर था, लेकिन उन्हें सेना और पुलिस की नौकरी से ही लगाव था।

आपको बता दें कि 14 फरवरी को बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में चीता घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में 3 जवान शहीद हो गए थे। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खबर के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान चलाया था, लेकिन इसकी जानकारी आतंकियों को पहले ही मिल गई थी। उन्होंने ठिकाना बदल लिया। चेतन ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान चीता पर 30 गोलियां दागी गईं, जिनमें 9 गोलियां लगी थीं।

घायल हालत में चीता को पहले श्रीनगर के आर्मी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी ब्लीडिंग रोकने के लिए दवाइयां दी गईं। हालांकि जख्म की गंभीरता को देखते हुए उन्हें एयर ऐंबुलेंस के जरिए एम्स ले जाने का फैसला किया गया। एम्स में पहले से ही तैयार डॉक्टरों की टीम ने कमांडेंट चेतन चीता का इलाज किया। विशेषज्ञों की एक टीम ने ऐंटीबायॉटिक थेरपी के जरिए उनकी देखरेख की थी। दो महीने के इलाज के बाद उनकी स्थिति ठीक हुई है।


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