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वर्ल्ड कप में भारत से मुकाबले से पहले सरहद पर पाकिस्तान की बड़ी साजिश का खुलासा

विश्वकप में आज भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला होना है। लेकिन इस मुकाबले से पहले सरहद पर पाकिस्तान की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि सरहद पार से करीब 15 करोड़ घुसपैठिये आसमान के रास्ते हमला करने वाले हैं। इनके निशाने पर है जोधपुर और जैसलमेर जैसे सरहदी इलाके है

Indian Army

Image Credit: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 जून): विश्वकप में आज भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला होना है। लेकिन इस मुकाबले से पहले सरहद पर पाकिस्तान की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि सरहद पार से करीब 15 करोड़ घुसपैठिये आसमान के रास्ते हमला करने वाले हैं। इनके निशाने पर है जोधपुर और जैसलमेर जैसे सरहदी इलाके है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुस्तान के बॉर्डर पर पाकिस्तान का टिड्डी दोबारा हमला करने वाला। एक महीने के भीतर हिंदुस्तान की सरहद पर पाकिस्तान के रास्ते दूसरी बार सबसे खतरनाक हमले की आशंका ने कोहराम मचा दिया है। पिछले महीने पाकिस्तान से आए करीब 15 करोड़ घुसपैठिये टिड्डियों ने राजस्थान के सरहदी इलाकों में ऐसा तांडव मचाया था सैकड़ों किसान त्राहिमाम कर उठे थे। ये हमला इतना खतरनाक था कि सेना से लेकर स्थानीय अधिकारियों तक सबके हाथ पैर फूल गए थे। एक साथ इतने बड़ी संख्या में आए हमलावरों से निपटने के लिए राजस्थान के रेगिस्तान में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था। 

Locusts Attack

अब एक बार फिर टिड्डियों का ऐसा ही खतरनाक हमला दोबारा होने वाला है। जिसका सामना करने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट है कि राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर जैसे सरहदी जिलों में बहुत जल्द टिड्डियों का बड़ा हमला हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक यमन ईरान से बड़ी संख्या में टिड्डियों के झुंड आते देखे गए हैं। टिड्डियों का ये झुंड बहुत जल्द पाकिस्तान पहुंचने वाला है। जून महीने के अंत तक ये झुंड भारत पहुंच सकता है। ये रिपोर्ट सामने आने केबाद राजस्थान का कृषि विभाग पूरी तरह चौकन्ना हो गया है और टिड्डी संगठन को हालात से निपटने के लिए अलर्ट कर दिया गया है। राजस्थान के कृषि विभाग और टिड्डी संगठन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए बड़ी तैयारी कर रखी है। टिड्डियों को भगाने के लिए विशेष मशीनें लगाई गई हैं। खेतों और पेड़ पौधों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। कृषि विभाग से जुड़े 77 अधिकारियों को तैयार रखा गया है। इनमें कृषि अधिकारी के साथ साथ कृषि पर्यवेक्षकों की टीम भी शामिल है जो टिड्डियों को रोकने के लिए कारगर कदम उठा रहे हैं।

पिछले महीने जब टिड्डियों का हमला हुआ था तो जोधपुर के टिड्डी नियंत्रण संगठन ने पूरी मुस्तैदी से उसका सामना किया था। तब कई अत्याधुनिक मशीनों के साथ बॉर्डर इलाकों में कीटनाशकों का छिड़काव किया गया था। पर इन कीटनाशकों से राजस्थान की कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को भी बड़ा खतरा हो सकता है। लिहाजा इस बार चुनौती ज्यादा बड़ी है क्योंकि एक तरफ इन टिड्डियों को भगाना है तो दूसरी ओर हजारों एकड़ में लगी फसलों के साथ साथ गोडावण जैसे पक्षियों को भी बचाना है। पाकिस्तान के बॉर्डर से लगे राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर में इन टिड्डियों के हमले का खतरा सबसे ज्यादा है। पिछली बार भी टिड्डियों के दल ने इन्हीं दो जिलों में सबसे पहले हमला किया था। आपको बता दें कि राजस्थान के इस इलाके में खरीफ फसल तैयार हो रही है। इनमें बाजरे और ग्वार की फसल सबसे ज्यादा है। अमरूद, आंवला, बेर और अंगूर की भी खेती है। ऐसे में अगर टिड्डियों से नहीं निपटा गया ये हजारों एकड़ में लगी फसल और फल की खेती को नुकसान हो सकता है क्योंकि करोड़ों टिड्डियों का ये दल कुछ ही दिनों में पूरी फसल चट कर सकता है। 

इससे पहले मई में पाकिस्तान से करीब 10-15 करोड़ टिड्डियों का दल भारत में घुसा था। 26 साल बाद इतनी बड़ी संख्या में रेगिस्तानी टिड्डियों ने हमला किया था। टिड्डियों का पहला झुंड 20 मई को जैसलमेर में देखा गया था। उसके बाद इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई और जैसलमेर से जोधपुर तक हजारों एकड़ की फसलों को नुकसान पहुंचा था। 21 मई को जैसलमेर के रामदेवरा में टिड्डियों को देखा गया था। उसके बाद टिड्डियों का दल मंगलियों की ढाणी पहुंच गया। पोकरण के लोहारकी में भी टिड्डियों का हमला हुआ। नहरी के मोहनगढ़, सादा माइनर और सुल्ताना में भी ये देखे गए। मामला गंभीर होता देख टिड्डियों को काबू में करने वाला विभाग हरकत में आया और कार्रवाई शुरू हुई। करीब 900 एकड़ इलाके में मेलाथिन नाम के केमिकल का छिड़काव किया गया लेकिन DNP एरिया में वन्यजीवों की सुरक्षा के कारण स्प्रे का छिड़काव रोक दिया गया।  इसकी वजह ये थी कि द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावन भी इसी इलाके में पाए जाते हैं। टिड् डी गोडावन का भोजन भी होती है। ऐसे में कीटनाशक के छिड़काव से जहर वाली टिड् डी गोडावन का भोजन बन सकती है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे कैपटिव ब्रीडिंग और अंडा संरक्षण केंद्र पर भी संकट आ सकता है। अब सवाल है कि अगर इन टिड्डियों पर केमिकल स्प्रे नहीं किया गया तो इन्हें काबू में कैसे किया जाएगा। चिंता इसलिए बड़ी है क्योंकि मादा टिड्डियां इलाके में घुसते ही अंडे देना शुरू कर देती है। जिससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है।सवाल ये भी है कि इन टिड्डियों को कंट्रोल करने में पाकिस्तान क्यों नाकाम रहा है। भारत पर बार बार होने वाले टिड्डियों के हमले के पीछे पाकिस्तान का बड़ा हाथ है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बार-बार पाकिस्तान से शिकायत करने के बावजूद वो अपने इलाके में इन टिड्डियों को काबू में करने के लिए कोई उपाय नहीं करता है। भारतीय अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान जानबूझकर ऐसी लापरवाही बरतता है, ताकि भारत को नुकसान पहुंचा सके। इस बारे में बहुत जल्द भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की एक बैठक होने वाली है।


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