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3 दिन में सिर्फ 300 मीटर आगे बढ़ सकी 300 टन की भगवान विष्णु की प्रतिमा

चेन्नई में विश्वरूप महाविष्णु की 64 फीट अखंड प्रतिमा को जो 300 टन से ज्यादा वजनी है, यह हर घंटे इंच-इंच भर आगे खिसक पा रही हैै। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वंदवासी तालुक स्थित कोराक्कोट्टाई गांव की एक पहाड़ी को काटकर यह विशालकाय प्रतिमा तैयार की गई है। इसे ले जाने के लिए विशेषरूप से बना 240 टायर वाला ट्रक लाया गया है। बीते कुछ दिन में यह प्रतिमा करीब 300 मीटर ही आगे बढ़ सकी है। पहाड़ी से यह तीन दिन में ही कुछ सौ मीटर आगे खिसकाई जा सकी है। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीन दिनों के भीतर इस विशालकाय प्रतिमा को लादकर ले जाने वाले विशेष ट्रक के कई टायर भी पंचर हो गए और उन्हें बदला गया।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 दिसंबर): चेन्नई में विश्वरूप महाविष्णु की 64 फीट अखंड प्रतिमा को जो 300 टन से ज्यादा वजनी है, यह हर घंटे इंच-इंच भर आगे खिसक पा रही हैै। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वंदवासी तालुक स्थित कोराक्कोट्टाई गांव की एक पहाड़ी को काटकर यह विशालकाय प्रतिमा तैयार की गई है। इसे ले जाने के लिए विशेषरूप से बना 240 टायर वाला ट्रक लाया गया है। बीते कुछ दिन में यह प्रतिमा करीब 300 मीटर ही आगे बढ़ सकी है। पहाड़ी से यह तीन दिन में ही कुछ सौ मीटर आगे खिसकाई जा सकी है। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीन दिनों के भीतर इस विशालकाय प्रतिमा को लादकर ले जाने वाले विशेष ट्रक के कई टायर भी पंचर हो गए और उन्हें बदला गया।

विष्णु की इस प्रतिमा को बेंगलूरु के कोठांडारामास्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट तक पहुंचाने के लिए सरकार ने तिरुवन्नामलई के जिलाधिकारी केएस कंडासामी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। कंडासामी ने कहा, "भगवान की यह प्रतिमा (जिनमें 246 टन के विष्णु और सात-सिर वाले आदिशेष) को 50 दिनों में पहुंचाया जाएगा।" 

कंडासामी शुक्रवार को मंदिर परिसर में पहुंचे और वहां के प्रशासन से तैयारियों के बारे में जायजा लिया। मुंबई की लॉजिस्टिक्स कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी के 30 कर्मचारी इस मुश्किल काम को पूरा करने की कोशिशों में जुटे हैं। उनके सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी स्थान की दलदली सड़क से थेल्लर-देसुर रोड तक पहुंचाने की है। हाल ही में हुई बारिश ने इस काम को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। कंपनी के मैनेजर राजन बाबू कहते हैं, "एक बार जब यह वाहन शुरुआती 500 मीटर की दूरी पूरी कर लेगा और थेल्लर-देसुर रोड पर पहुंच जाएगा, तब यह बिना किसी परेशानी के सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ सकेगा।" उन्हें उम्मीद है वो रविवार तक मुख्य सड़क पर पहुंच जाएंगे।

बता दें कि एक रिटायर्ड गवर्नमेंट डॉक्टर का यह ख्वाब था कि वह बेंगलुरु के मंदिर में 108 फीट ऊंची विश्वरूप महाविष्णु की प्रतिमा स्थापित कराएं, जिसमें 11 अवतार, 22 हाथ के साथ ही सात सिरवाले आदिशेष यानी नागराज हों। उन्होंने अपने इस ख्वाब को साकार करने के लिए पांच वर्षों तक कड़ी मेहनत की थी।  


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