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बजट में सरकार के सामने होंगी ये चुनौतियां...

एक फरवरी को मोदी सरकार अपना बजट पेश करेगी। इस बार के बजट की घोषणाएं इसलिए अहम हैं क्योंकि देश की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। देश मंदी से जूझ रहा है, हर तरफ महंगाई की मार है तो वहीं बेरोजगारी बढ़ चुकी है। लोगों के पास नौकरियां नहीं हैं, जिनके पास नौकरियां हैं वो भी हाथ से निकली दिख रही है।

मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली, 27 जनवरी: एक फरवरी को मोदी सरकार अपना बजट पेश करेगी। इस बार के बजट की घोषणाएं इसलिए अहम हैं क्योंकि देश की आर्थिक हालत सामान्य नहीं है। देश मंदी से जूझ रहा है, हर तरफ महंगाई की मार है तो वहीं बेरोजगारी बढ़ चुकी है। लोगों के पास नौकरियां नहीं हैं, जिनके पास नौकरियां हैं वो भी हाथ से निकली दिख रही है। एक एजेंसी आकड़ें बताते हैं कि अगले 1 साल में करीब 16 लाख नौकरियां जा सकती है। ऐसे में वित्त मंत्री के बजट में नौकरियों के लिए क्या है, इसपर सबकी नजर है।

घटती नौकरियां, बेरोजगारी, लोगों के ठप्प पड़े काम, मोदी सरकार के सामने बजट में सबसे बड़ी चुनौती है। मोदी सरकार ने लोगों को सामने करोड़ों नौकरियों का वादा किया था पर आर्थिक सुस्ती ने बेरोजगारी के आंकड़ें बढ़ा दिए हैं और नौकरी को घटा दिया है। 1 फरवरी को केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। सवाल है कि रोजगार पाने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिये इस बार वित्त मंत्री के पोटली में क्या होगा। केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर बजट को लेकर आश्वस्त हैं, पर बेरोजगारी के आंकड़े देश के लिए ठीक नहीं लग रहे।

सरकार के सामने चुनौतियां:

- एक साल में 16 लाख रोज़गार के मौक़े घटेंगे

- 11 साल में सबसे कम 5 फ़ीसदी पर जीडीपी

- आर्थिक सुस्ती से कंपनियों में रोज़गार कम

- सरकारी नौकरियों में 39 हज़ार मौक़े कम होने का अनुमान

- बेरोज़गारी दर 45 बरसों में सबसे अधिक

- नौकरीपेशा की सैलरी कम होने का अंदेशा

मतलब, सरकार के आंकड़ों में अर्थव्यवस्था की सुस्ती का सीधा असर बेरोज़गारों के भविष्य और रोज़गार करने वालों की आमदनी पर पड़ता दिख रहा है। स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के ईकोरैप के आंकड़ों के मुताबिक, 2018-19 की तुलना में 2019-2020 में 15.8 लाख रोज़गार के मौक़े कम होंगे। ये आंकड़े जले पर नमक छिड़कने जैसा है। बेरोजगारी दर पहले ही 45 साल के उच्चतम स्तर पर, इसमें और इजाफा होने से सरकार पर दबाव बढ़ेगा। बजट से पहले ही विपक्ष बेरोज़गारी के नए आंकड़ों पर मोदी सरकार की घेराबंदी में जुट गया है। सरकार की घेराबंदी भी बेवजह नहीं है। रोज़गार के खराब आंकड़ों के साथ महंगाई दर भी सात साल में सबसे अधिक है।

बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार 100 लाख करोड़ का निवेश करने जा रही है। ज़ाहिर है बुनियादी ढांचे में निवेश करने से रोज़गार के मौक़े भी बढ़ेंगे और औंधे मुंह पड़े मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में भी तेज़ी आएगी, लेकिन क्या इससे बेरोज़गार दर कम करने में मदद मिलेगी। आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि सरकार को वित्तीय घाटे की छोड़कर ज्यादा से ज्यादा पैसे खर्च करने चाहिये इससे देश में खपत को बढ़ाने में मदद तो मिलेगी ही इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उम्मीद है कि 2030 तक भारत में 10 करोड़ नए शिक्षित युवाओं के रोजगार होगा। इतनी बड़ी आबाजी के लिये रोजगार के अवसर जुटाने के लिये सरकार को अभी से प्रयास करने होंगे।


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