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CAA: चाहिए भारतीय नागरिकता तो देने होंगे धर्म के सबूत

CAA को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। मुस्‍लिम समुदाय हो इससे बाहर रखे जाने के बाद दिल्‍ली से लेकर देश के हर कोने पर इसे वापस लेने के लिए लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। हालांकि गृह मंद्धी अमित शाह ने साफ कर दिया है कि कुछ भी हो जाए, लेकिन केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेगी।

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 (Image Credit: Google)

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 जनवरी): CAA को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। मुस्‍लिम समुदाय हो इससे बाहर रखे जाने के बाद दिल्‍ली से लेकर देश के हर कोने पर इसे वापस लेने के लिए लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। हालांकि गृह मंद्धी अमित शाह ने साफ कर दिया है कि कुछ भी हो जाए, लेकिन केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेगी। हालांकि चार राज्‍यों में सीएए के खिलाफ प्रस्‍ताव भी पारित कर दिया है और उन्‍होंने इसे अपने राज्‍यों में लागू नहीं करने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में सीएए को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। जिसके मुताबिक जिन लोगों को सीएए के आधार पर भारतीय नागरिकता (Citizenship) दी जाएगी, उनको भी अपने धर्म के सबूत पेश  (Religion Proof)  करने होंगे।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने यह तय किया है कि सीएए के तहत भारत की नागरिकता मांगने वालों को अपने धर्म का सबूत पेश करना होगा। हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन या पारसी आवेदकों को इस बात का भी सबूत देना होगा कि वे 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में आये थे। भारत सरकार के अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को संशोधित नागरिकता कानून के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन देते समय अपने धर्म का सबूत पेश करना होगा।

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार सीएए के तहत असम के कुछ खास नियम भी बना सकती है। सूत्रों के मुताबिक असम में नागरिकता के लिए आवेदन भरने वाले लोगों को सिर्फ तीन महीने का वक्त मिलेगा। आप को बता दें असम सरकार ने केन्द्र सरकार से इस तरह का प्रावधान लागू करने के लिए अनुरोध किया था।

किन्‍हें मिलेगी भारतीय नागरिकता...

नए कानून के मुताबि, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान के अल्पसंख्यक भारत में रहने के हकदार हो जाएंगे। ऐसा होने के लिए उन्हें भारत में पहले 11 साल शरणार्थी के तौर पर बिताना होता था। लेकिन, नए कानून में प्रस्ताव किया गया है कि वे बस छह साल में ही इसके लिए पात्र हो जाएंगे। संशोधन के मुताबिक, "पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 14 दिसंबर 2014 से पहले आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को छह साल भारत में रहने के बाद भारत की नागरिकता दे दी जाएगी।

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