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CAA पर शाहीनबाग में जारी सियासत में मनोज तिवारी भी कूदे

दिल्ली चुनाव के दौरान बीजेपी शाहीन बाग को मुद्दा बनाना चाहती है। इस ट्वीट को मनोज तिवारी ने राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को टैग कर दिया है। उन्होंने लिखा है, ''39 दिन हो गए शहीन बाग के कारण यातायात ठप्प, लाखों लोग परेशान। बच्चे परीक्षा के समय भी 2-2 घंटे सड़कों पर बर्बाद कर रहे है। ऑफ़िस जाने वालों को परेशानी। व्यापारियों को नुक़सान। क्या ये जायज़ हैं?''

नई दिल्ली, 21 जनवरी: नागरिकता कानून पर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां आज CAA के खिलाफ दाखिल की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। तो वहीं इस मामले पर गृहमंत्रालय में इसे लेकर एक अहम बैठक होने वाली है। लखनऊ और दिल्ली के शाहीन बाग में महिलाओं और बच्चों का प्रदर्शन जारी है। वहीं कल लखनऊ में अमित शाह ने दो टूक कहा कि सरकार CAA से किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी।

शाहीन बाग के प्रदर्शन को लकेर मनोज तिवारी ने भी ट्वीट किया है। दिल्ली चुनाव के दौरान बीजेपी शाहीन बाग को मुद्दा बनाना चाहती है। इस ट्वीट को मनोज तिवारी ने राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को टैग कर दिया है। उन्होंने लिखा है, ''39 दिन हो गए शहीन बाग के कारण यातायात ठप्प, लाखों लोग परेशान। बच्चे परीक्षा के समय भी 2-2 घंटे सड़कों पर बर्बाद कर रहे है। ऑफ़िस जाने वालों को परेशानी। व्यापारियों को नुक़सान। क्या ये जायज़ हैं?''

एक कानून जिसे देश में लागू कर दिया गया है और इसी कानून के विरोध में शाहीनबाग में कानून टूट रहा है। करीब 40 दिन हो गए है, सड़क जाम हैं, बच्चे परेशान हैं और व्यापारियों का बंद पड़ा काम है, करें तो क्या करें। इस मसले को सुझाने के लिए बताचीत के दौर चले और चल भी रहे हैं। इसी कड़ी में शाहीनबाग में प्रदर्शन कर रहे कुछ एलजी अनिल बैजल मिलने पहुंचे, जिसमें कुछ बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल थी, लेकिन इस मुलाकात को प्रर्दशन कर दूसरे गुट ने गलत बता दिया। यहां तक ये भी कह दिया गया महिलाओं बरगला कर एलजी के पास ले जाया गया है। साथ ही प्रदर्शनकारी महिलाओं पर पैसे लेकर धरना का आरोप लगाने को लेकर बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को 1 करोड़ की मानहानि का नोटस भी भेजा गया है।

शाहीनबाग में प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों की एलजी से मुलाकात के बाद ऐसा लग रहा है बातचीत मामले को सुलझा लिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने आपनी मांग को एलजी के जरिए गृहमंत्रालय तक पहुंचाया है तो वहीं उन्होनें स्कूल वैन और एंबुलेंस के लिए रास्ता खोलने की बात भी कही है। बच्चे तो बच्चे अभिभावकों के भी इस जाम से दो चार होना पड़ा रहा है। पहले को स्कूल छोड़ने के लिए आने और और स्कूल से बच्चो को ले जाने में 10 से 12 मिनट लगते थे, अब ढेड़ से दो घंटे लगते हैं।

परेशानी आलाम यही तक सीमित नहीं है। परेशान वो भी है। जो व्यापार और नौकरी करते हैं, जिनके शाहीनबाग में दफ्तर है या फिर दुकानें हैं रोज़ लाखों का नुकसान हो रहा है और इसकी भरपाई कैसे होगी ये कोई नहीं जानता। उधर आज सुप्रीम कोर्ट में भी शाहीनबाग मामले पर सुनवाई होनी है, जिसके बाद ही सरकार और प्रदर्शनकारी दोनों ही अपनी-अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। फिलहाल तो शाहीनबाग में प्रदर्शन जारी है और प्रदर्शन के बीच राजनीति भी खूब फल फूल रही है। ऐसे में आम लोगों की समस्या का समाधान कैसे निकलेगा, जिसक जवाब अभी तक तो किसी के पास नहीं है।


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