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1 फरवरी को बजट पेश करेगी मोदी सरकार, जानें ये जरूरी बातें

केंद्र सरकार (Union Minister) हर साल अपना बजट (Budget) पेश करती है, जिससे गरीब, किसान, मजदूर और हर किसी को आस होती है कि सरकार (Government) उनके लिए क्या घोषणा करेगी। नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(22 जनवरी): केंद्र सरकार (Union Minister) हर साल अपना बजट (Budget) पेश करती है, जिससे गरीब, किसान, मजदूर और हर किसी को आस होती है कि सरकार (Government) उनके लिए क्या घोषणा करेगी। नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार 1 फरवरी को अपना आम  बजट (Budget) पेश करने जा रही है। आर्थिक हालात के मद्देनजर निर्मला सीतारमण इस सरकार के लिए अब तक का सबसे चैलेंजिंग बजट पेश करेंगी। विकास दर 11 सालों के न्यूनतम स्तर पर है, बेरोजगारी दर 4 दशकों के उच्चतम स्तर पर है, तमाम कोशिशों के बावजूद मांग में तेजी नहीं आ रही है। सरकार की हर कोशिश का बोझ राजकोषीय खजाने पर बढ़ता जा रहा है। एक फरवरी को जब सदन में बजट पेश किया जाएगा तब कई सारे ऐसे शब्द आपके सामने आएंगे, जिनसे आप वाकिफ नहीं होंगे। अगर आप इन शब्दों का मतलब जानते हैं तो आपके लिए यह समझना आसान होगा कि क्या चर्चा हो रही है, इसलिए कुछ महत्वपूर्ण शब्दों के बारे जानकारी लेना जरूरी है।

1- इन्फ्लेशन (महंगाई दर)

बजट के दौरान इस शब्द का बार-बार जिक्र किया जाएगा। इन्फ्लेशन का मतलब महंगाई दर से है। इसे पर्सेंट में व्यक्त किया जाता है। महंगाई दर बढ़ने का आसान मतलब है कि करेंसी की वैल्यू गिर रही है जिससे खरीदने की क्षमता घट जाती है। दिसंबर में यह रीटेल इन्फ्लेशन) पांच सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। खरीदने की क्षमता घटने का मतलब मांग में कमी आना।

2- प्राइमरी डेफिसिट

फिस्कल डेफिसिट में पूर्व में लिए गए कर्ज पर इंट्रेस्ट पेमेंट्स को घटाने पर प्राइमरी डेफिसिट आता है। फिस्कल डेफिसिट में सरकार द्वारा लिया जाने वाला कर्ज और पुराने कर्ज पर चुकाने वाला इंट्रेस्ट शामिल होता है। प्राइमरी डेफिसिट में पुराने कर्ज पर चुकाने वाले इंट्रेस्ट को नहीं जोड़ा जाता है। भारत में फिस्कल डेफिसिट का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज पर चुकाए जाने वाला इंट्रेस्ट होता है।

3- फिस्कल पॉलिसी

सरकार किस तरह खर्च करेगी और टैक्स सिस्टम क्या होगा, यह उसका ब्लूप्रिंट होता है। सरकार फिस्कल पॉलिसी तैयार करती है और रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी तैयार करता है। इस पॉलिसी के तहत सरकार महंगाई दर, बेरोजगारी दर और मौद्रिक नीति को लेकर फैसला करती है। इकनॉमिक हेल्थ के लिए इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

4- ट्रेड डेफिसिट

ट्रेड डेफिसिट कैड का बहुत बड़ा हिस्सा होता है। ट्रेड डेफिसिट बढ़ने का मतलब एक देश ज्यादा खरीद रहा है और कम बेच रहा है। जब निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ता है तो इसे ट्रेड डेफिसिट कहते हैं।

5- फिस्क्ल डेफिसिट

सरकार का खर्च जब कमाई से बढ़ जाता है तो इसे फिस्कल डेफिसिट कहते हैं। इसमें सरकार द्वारा लिया जाने वाला कर्ज शामिल नहीं होता है। सरकार पर कर्ज और फिस्कल डेफिसिट दो अलग-अलग शब्द हैं, जिसमें काफी अंतर है। फिस्कल डेफिसिट को पर्सेंट में (जीडीपी के मुकाबले) व्यक्त किया जाता है।

6- रेवेन्यू डेफिसिट

सरकार हर साल कमाई का लक्ष्य निर्धारित करती है। अगर कमाई उम्मीद से कम होती है तो इसे रेवेन्यू डेफिसिट कहते हैं। रेवेन्यू डेफिसिट का मतलब सरकार ने वित्त वर्ष के दौरान ज्यादा तेजी से खर्च किया। दूसरे शब्दों में सरकार ने जरूरी खर्च के लिए कम से कम कमाई नहीं की। विनिवेश का फैसला रेवेन्यू डेफिसिट पर बहुत हद तक निर्भर करता है।

7- जीडीपी

बजट और अर्थव्यवस्था के लिहाज से जीडीपी सबसे महत्वपूर्ण शब्द है। देश द्वारा एक वित्त वर्ष में कितने वैल्यू की गुड्स और सर्विस पैदा की गई उसे जीडीपी कहते हैं। खर्च के लिहाज से- कंज्यूमर द्वारा, बिजनस द्वारा और सरकार द्वारा जितनी रकम खर्च की गई है उसे जोड़ने पर जीडीपी निकलता है। भारत के जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान सबसे ज्यादा है।

8- डिस-इन्वेस्टमेंट (विनिवेश)

जब सरकार अपनी संपत्ति को बेचकर कमाई करती है तो इसे डिस-इन्वेस्टमेंट (विनिवेश) कहते हैं। एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में सरकार ने भारत पेट्रोलियम, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, पोत परिवहन निगम (एससीआई) के विनिवेश का ऐलान किया था।

9- बजट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। बैलेंस बजट में सरकार की कमाई और खर्च बराबर होता है। सरप्लस बजट में सरकार की कमाई खर्च से ज्यादा होती है। डेफिस्ट बजट में सरकार की कमाई खर्च से कम होती है। डेफिसिट को जीडीपीए के मुकाबले पर्सेंट में दर्शाया जाता है।

10- करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD)

यह शब्द ट्रेड के लिहाज से बेहद अहम है। जब एक देश द्वारा गुड्स और सर्विस की इंपोर्ट वैल्यू एक्सपोर्ट्स के बढ़ जाती है तो उसे करंट अकाउंट डेफिसिट कहा जाता है। इसका असर देश के बैलेंस पेमेंट पर होता है साथ ही CAD बढ़ने से करेंसी की वैल्यू घटती है। कैड को जीडीपी के मुकाबले पर्सेंट में लिखा जाता है।


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