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कुमारस्वामी ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा, सरकार बनाने का दावा पेश करेगी BJP

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) के गठबंधन की सरकार गिर गई है। मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पेश किया गया था जिसमें कुमारस्वामी बहुमत साबित करन

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(23 जुलाई):  कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) के गठबंधन की सरकार गिर गई है। मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पेश किया गया था जिसमें कुमारस्वामी बहुमत साबित करने में असफल रहे। कुमारस्वामी के पक्ष में जहां 99 वोट पड़े वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में 105 वोट पड़े। इसके साथ ही 14 महीने के भीतर कुमारस्वामी की सरकार गिर गई। इसके बाद कुमारस्वामी ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। 

कुमारस्वामी सरकार गिरने के बाद बीजेपी के दफ्तर में जश्न का माहौल है। अब माना जा रहा है कि बीजेपी कर्नाटक के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा, कर्नाटक के नए 'स्वामी' (मुख्यमंत्री) बन सकते हैं। बीजेपी अगले 2 दिनों में राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। अगले दो दिनों में राज्यपाल से मिलकर बीजेपी सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती हैं। सरकार गिरने के बाद बीजेपी ने विधानसभा में ही जीत की खुशी जताई। अब बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने की तैयारी में है। 

बता दें कि कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बीएस येदियुरप्पा 3 बार सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। तालुक अध्यक्ष से अपना सियासी सफर शुरू करते हुए येदियुरप्पा ने राज्य की सबसे बड़ी सियासी कुर्सी तक पहुंचे. वह 7 बार विधायक रहे और एक बार लोकसभा सांसद भी चुने गए। इसके अलावा वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। बीजेपी के सबसे विवादित नेता होने के बावजूद कर्नाटक में वह पार्टी का सबसे भरोसेमंद चेहरा हैं।

साल 1994 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार हुई और येदियुरप्पा को सदन में नेता प्रतिपक्ष चुनाव गया। 1999 में येदियुरप्पा विधानसभा चुनाव हार गए लेकिन तब उन्हें पार्टी ने विधान परिषद भेजने का फैसला किया। 2004 में कांग्रेस-जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई और कांग्रेस के धरम सिंह मुख्यमंत्री चुने गए। इस दौरान भी येदियुरप्पा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में थे।

जेडीएस के कुमारस्वामी ने धरम सिंह की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिर गई। इसके बाद 2006 में कुमारस्वामी बीजेपी के सहयोग से मुख्यमंत्री चुने गए और येदियुरप्पा उस सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे। लेकिन जब गठबंधन के तहत येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो जेडीएस ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। हालांकि नवंबर 2007 में जेडीएस, येदियुरप्पा को समर्थन देने को राजी हो गई और तब दक्षिण भारत में पहली बार बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी। येदियुप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन उनकी सरकार 10 दिन भी नहीं चल सकी।

इसके बाद साल 2008 में फिर से चुनाव कराए गए और पहली बार दक्षिण के राज्य में बीजेपी ने अकेले दम पर सरकार बनाई और येदियुरप्पा राज्य के मुख्यमंत्री चुने गए। इस सरकार ने पूरे 5 साल शासन किया, हालांकि येदियुरप्पा को अवैध खनन मामले में लोकायुक्त की जांच का सामना करना पड़ा और उनकी जगह 2011 में डीवी सदानंद गौड़ा को मुख्यमंत्री पद दिया गया। इसी सरकार में जगदीश शेट्टार को भी 10 महीने मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।

बीजेपी से नाराज चल रहे येदियुरप्पा ने इसके बाद 2012 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कर्नाटक जनता पक्ष के नाम से एक नई पार्टी का गठन किया। इसके बाद 2013 में शिमोगा से एक बार फिर येदियुरप्पा विधायक चुने गए। हालांकि इसी साल उन्होंने फिर से बीजेपी में वापसी का ऐलान भी कर दिया. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले येदियप्पा की पार्टी का विलय बीजेपी में हो गया।


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