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दिमाग को खा जाता है यह कीड़ा, 14 दिन में इंसान की हो जाती है मौत

नई दिल्ली (28 जनवरी): खबरदार ! कोलकाता में दीमाग की नसों को खा जाने वाला बैक्टीरिया फिर से जीवित हो गया है।  यह कीड़ा पचास साल बाद फिर से कोलकाता की आवो-हवा में पाया गया है। नज़रों से प्रायः ओझल रहने वाला यह कीड़ा नाक के रास्ते दीमाग में पहुंचता है और सेरेब्रल टिश्यू को खा जाता है। यह बैक्टीरिया हवा के साथ-साथ पानी में भी आसानी से पैर पसारता है।

जब यह किसी व्यक्ति के दीमाग के टिश्यूज़ को खाना शुरु करता है तो उसे 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' नाम की प्राणघातक रोग लग जाता है।मैनिनजोएनसेफेलाइटिस से ग्रस्त 100 में से सिर्फ दो लोग ही बच पाते हैं। इसलिए यह भी कहा जाता है कि 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' लाइलाज रोग है।

कोलकाता के सीएमआरआई अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक पिछले महीने 14 साल के एक लड़के में 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' पायी गयी। डॉक्टरों ने कहा कि इस लड़के बच जाना अपने आप में एक आश्चर्य है। क्यों कि भारत में 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' के सिर्फ पांच ही रोगी जीवित बच पाये हैं। सीएमआरआई के डॉक्टरों के एलर्ट पर कोलकाता के शहर के सभी स्वीमिंग पूल्स पर अतिरिक्त एहतियात बरतने की हिदायत दी गयीं हैं।

इस लड़के का इलाज करने वाली डॉक्टर सुष्मिता बनर्जी ने बताया कि नीगलेरिया फॉवलेरी नाम का बैक्टीरिया साफ पानी वाले स्वीमिंग पूल, तालाब और नदियो में भी पाया जाता है। उसकी फेसबुक पोस्ट्स से पता चला कि वो स्वीमिंग का शौकीन था। बस, इसी आधार पर उसका टेस्ट करवाया गया और वो 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' पॉजिटिव निकला। डॉक्टर बनर्जी ने कहा अमूमन 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' के रोगी की मौत दो हफ्ते के भीतर हो जाती है, मगर इस मामले में सौभाग्यशाली रहे कि 'मैनिनजोएनसेफेलाइटिस' का समय से पता चल गया और एक जीवन बच गया।


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