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बड़ा खुलासा, नेता ऐसे कर रहे हैं अपने कालेधन को सफेद

मुंबई (17 नवंबर): कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के मसकद से प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोट पर पाबंदी लगाने के ऐलान किया। पीएम मोदी के इस नोटबंदी से देशभर में कालेधन के कुबेरों की नींद उड़ी हुई है। भारी ताताद में लोग अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाने के तरह-तरह के जुगत लगा रहे हैं। एक तरफ भारत सरकार कालेधन के खिलाफ लड़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इससे बचने का भी रास्‍ता निकाल लिया है। वे बचने के लिए को-ऑपरेटिव बैंकों का सहारा ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में भारी तादाद में नेता को-ऑपरेटिव बैंकों में अपना पैसा जमकर रहे हैं। 

दरअसल, को-ऑपरेटिव बैंकों में अब भी कई जगह कम्प्यूटराइजेशन नहीं हो सका है। वहां अब भी लेजर बुक्स में खाते का हिसाब किताब रखा जाता है। वे कस्टमर्स से कैश ले रही हैं और बैक डेट में एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट खोल रही हैं। इसके साथ ही इन बैंकों से कैश के बदले ​डिमांड ड्राफ्ट भी इश्यू किये जा रहे हैं। यह काम ज्यादातर राजीतिज्ञ कर रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर के लोगों ने कहा कि कुछ लोग इस लूपहोल के जरिए अपने कालेधन को सफेद में बदलने की चालाकी कर रहे हैं। वे कैश के बदले डीडी या एफडी विकल्प को चुन रहे हैं। ऐसा सभी बैंकों को आॅदेश है कि वे लोगों से कैश लें और उसके एवज में नई करंसी के नोट मुहैया कराएं।

31 मार्च के बाद को-ऑपरेटिव बैंक डीडी को कैंसल कर इसे लेने वाले को कैश मुहैया करा देगी और इसे पाने वाला कालाधन रखने की श्रेणी में भी नहीं आएगा। हालांकि, RBI इस लूपहोल को बंद करने पर काम कर रहा है। इस केंद्रीय बैंक ने कदम उठाते हुए मंगलवार रात एक प्रेस रिलीज जारी की। उसमें उसने सभी को-ऑपरेटिव बैंकों को नोट निकासी संबंधी नियमों के प्र​ति चेतावनी दी।

 


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